जिनवाणी का सार जीवन समन्वय बनें व अपनी दृष्टि को समन्वय बनावें- श्री विनय मुनि जी

जिनवाणी का सार जीवन समन्वय बनें व अपनी दृष्टि को समन्वय बनावें- श्री विनय मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 3 अगस्त।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए धर्मकथांनुयोग बहुत दिनो से चल रहा हे यह कथा जीवन जीने की कला सिखाता राजा ध्वल महारानी पद्मावती व पुत्र उदयवीर वीर वान की कथा व मंत्री सुबुद्धि का वफादारी का सार बताया जा रहा

मन के सारे राजा ने कहा सबसे पहले मंत्री सुबुद्धि को तुरंत बुलाकर कहा खींचा में जल कर मर जाऊं सारी प्रजा मेरे खून की प्यासी बन रही हे विनासकाल विपरित मेरी बुद्धि हो गयी क्योंकि प्रजा उनके पूजनीय देव तुल्य राजकुमार उदयवीर व वीर वान की हत्या का सुनते प्रजा सहम गयी और राजा के प्रति रोश उत्पनन होने लगा।


इससे पहले म सा ने भजन से कहा ओ महावीर स्वामी बना दो मुझे ज्ञानी पिला दो अमृत वाणी मुझे आना है तुम्हारे सामने,ऐसा कोनसा धर्म है जिस धर्म में मनुष्य लग जाता उसको देवता भी नमस्कार कर लेते वो धर्म जैन धर्म अहिंसा का है जो समन्वय बनाता है।और आज हमारा मन घर परिवार आफिस में उलझा हुआ है,हमारी दृष्टि समन्वय बनावें जिससे प्रतिष्ठा इज्जत बढेगी जैसे सूई में धागा दोनों का समन्वय होता है, परिवार का समन्वय बना रहना जरूरी है नहीं तो रोज रामायण महाभारत बनती जायेगी।


म सा ने समझाया हाथो पांचों अंगुलियों का आपस में समन्वय जरुरी हे सभी अंगलुयों की विशेषता अलग अलग होती है मध्यमा का प्रयोग तिलक लगाने में होती है कनिष्का कानों को साफ करवा देती है माता का चरण अंगुष्ठ अपनी ज्योती केन्द्र पर लगा देते हैं उसकी चंदन की खुशबू खिंची चली आती है।आज की जिनवाणी सुनाने का सार जीवन समन्वय बनें।


इससे पहले श्री प्रमोद मुनि जी म सा ने कहा हमारी इन्द्रियां कहा जा रही है,हमें इन्द्रियों के विषयो पर कन्ट्रोल करना पड़ेगा क्योंकि हमारा मन बड़ा चंचल है भजन से कहा यह मन बड़ा चंचल है केसे तेरे भजन करूं जितना इसे समझाऊं उतना मचल जाए,सुबह शाम जिस घर में धर्म ध्यान होगा बड़ा भाग्यशाली परिवार होगा। धर्म में श्रद्धा हो तो देव भी वितराग देव बन जाते हैं।आज व्यक्ति इस संसार को कारागृह समझ बैठा अपने आप को बंधिस में बांध बेठा।


संचालन विजय ओस्तवाल ने करते हुए बताया कल जन्माष्टमी का प्रवचन श्री कृष्ण की उपयोगिता पर रविवार का प्रवचन धर्म का फल तुरंत ले।आज छत्तीसगढ़ से एम पी से व आसपास से काफी जनों की उपस्थिति रहीं।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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