श्री कृष्ण वासूदेव सम्यक दृष्टि होने के साथ कर्म पुरुष थे, घर घर जाकर माक्खन खाते प्रेम बढ़ाते- श्री विनय मुनि जी म सा।

श्री कृष्ण वासूदेव सम्यक दृष्टि होने के साथ कर्म पुरुष थे, घर घर जाकर माक्खन खाते प्रेम बढ़ाते- श्री विनय मुनि जी म सा।

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 4 सितंबर ।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए भगवान श्री कृष्ण के पास सत्ता संपत्ति होते हुए ग्वाला बनकर नोकर के समान गायों की सेवा करते रहते थे वह सम्यक दृष्टि थे गुरु भक्ति वाले, खून देने को तैयार रहते थे।

संसार में जितने भी प्राणी थे उनका सदाचार रखते थे सभी की सेवा का दायित्व निभाने को तैयार हो जाते क्यूं कि वह घर घर जाकर माक्खन खाकर प्रेम बढ़ाते गयें।हमें भी इनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सेवा गुण अपनावें।
(आ जाओ कृष्ण तेरी जरूरत आज है)


म सा ने बताया कृष्ण ज्यंती आज है अष्टमी पर्व महान,आ जाओ कृष्ण जी तेरी जरुरत आज है,घर घर मक्खन खाकर तूने प्रेम भाव बढ़ाया, न्याय निति की रक्षा खातिर बने सारथी प्यारे हो,आज जन्माष्टमी का पवित्र दिवस है संसार में तीन तरह के महापुरुष होते हैं पहला धर्मपुरुष तीर्थकर भगवान होते वो सबसे उत्कृष्ट बलशाली होते इनमे एक करोड़ इन्द्र मिलकर इनकी कनिष्क अंगुली को किसी प्रकार से हिला नहीं सकते।

दुसरा भोग पुरुष जो चक्रवती होते हैं जो छः खण्डों को एक क्षत्र राज्य करते हैं तीसरा कर्म पुरुष वह अपने पुरूषार्थ के बल पर पराक्रम से शान से राज्य को प्राप्त करते हैं इसलिए वासूदेव श्रीकृष्ण को कर्म पुरुष कहा गया।
(धर्म दलाली करके तीर्थकर गोत्र का बंध कर लिया)
म सा ने बताया श्रीकृष्ण धर्म दलाली करके तीर्थकर गोत्र का बंध कर लिया था,वह अपने कषायो (क्रौध मान माया लोभ) को पतला करके धर्म सेवा में लग गये।

भजन से कहा मैं सयंम नहीं ले सकता जो लेते वो लेवें श्रीकृष्ण सभी को आंनद देवे तुम धर्म दलाली कर लो जिन शासन कहता आओ भगवान बना दूंगा में.. श्रीकृष्ण गुण दृष्टि थे वह अच्छाई बुराई,अमृत जहर, सुगंध दुर्गंध,फूल कांटे में सिर्फ उनकी छोटी सी छोटी चीजों में गुणों को ढूंढ लेते थे उनके देखने का नजरिया देवो की सभा में चर्चा होती रहती थी, इसलिए वह सम्यक दृष्टि वाले बन गये थे।


(श्रीकृष्ण की मातृभक्ति देखने लायक होती)
म सा ने कहा श्रीकृष्ण अपनी मातृभक्ति के लिए जाने जाते उनके माता का चरण वंदन चक्र चार महिने में परे होता था रोज चारसौ माता को वंदन करते थे तब जाकर बहतर हजार माता को वंदन करने का चक्र पुरा होता था।

रोज चार सौ माता का आशिर्वाद से उनका जीवन बहुयामी बन गया था यही नहीं वह गौ माता से भी बहुत प्यार था,आज घर घर में चार पैरों वाला कुत्ता रखवाली कर रहा पहले हर घर में गाये थी भजन से बताया कहां गये गोपाल कृष्ण जो गऊंओ को लाड लगाते थे।


(पहले दुध की नदियां आज खून की बहनें लगी)
म सा ने समझाया पहले के समय दुध की नदियां बहती थी आज खून की नदियां बहने लगी क्योंकि आज अधर्मी बहु बेटी को देख देख कर खा गये यह समय का फेर है,आज मानवता को जिवित रखने के लिए मानव बन कर हर घर में एक गाय पालनी चाहिए यह मानव का धर्म की सबसे बड़ी सेवा होगी।

भजन की पंक्तियो से समझाया वीर जिनेश्वर सोई दुनिया जगाई तुने ज्ञान की मधुर सुरिली बंशी बजाती तुने, पशुओं पर छुरियां चलती रक्त की नदियां बहाई तुने, बढती करूण के सागर करुण की गंगा बहाई तुने।


(सर्वश्रेष्ठ सम्यक दर्शन है)
इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने कहा संसार में सर्वश्रेष्ठ हीरे मोती सोना चांदी से बढ़कर सम्यक दर्शन को माना गया।ज्ञानी जन इस संसार में सुखी होते हैं क्योंकि उनकी धर्म में सच्ची गहरी श्रद्धा है वह दुःखों को मानते नहीं उनके अंदर ज्ञान को जो प्रकाश आने से जीवन में परिवर्तन आया। जैन दर्शन कहता भगवान पर पूर्ण श्रद्धा होनी चाहिए।आज कमजोर व्यक्ति को ताकतवर खाते जा रहा हैं।


म सा ने कहा धर्म के मार्ग पर चलने से स्वयं का और देश का कल्याण हो जाता है।सम्यक दर्शन कहता मेरा कल्याण में ही कर सकता दुसरा नहीं कर सकता,जो गुण हमारे अंदर से उसे छोड़े नही,आज नाम तो राम का लेते काम कंस वाला करते। भगवान की वाणी सुनने के लिए छः खण्ड के चक्रवती भी आ जाते थे।आज व्यक्ति सता के नशे में अंधा बनता जा रहा।पाप से बचकर जिंदगी की शुरुआत करनी चाहिए।


संचालन विजय औस्तवाल ने करते हुए कहा रविवार का प्रवचन धर्म का फल तुरंत मिले इसी के साथ उपवास बेला तेले के प्रत्याखान हुए।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

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