रायपुर (अमर छत्तीसगढ़) 4 सितंबर ।
श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर में ससंघ विराजमान परम पूज्य मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज, मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज, एलक 105 श्री धैर्य सागर जी महाराज एवं एलक 105 श्री स्वागत सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अंतर्गत धर्म की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है।
समयोपदेश वर्षायोग के अध्यक्ष नरेंद्र जैन गुरुकृपा, ट्रस्टीगण प्रभात जैन,सनत जैन, भरत जैन भोरावत,संजय जैन,रायपुर सकल दिगम्बर जैन समाज एवं बड़ा मंदिर के अध्यक्ष संजय नायक उपाध्यक्ष श्रद्धेय जैन,मीडिया प्रभारी प्रणीत जैन ने बताया कि आज प्रातःकालीन धार्मिक कक्षा में पूज्य मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जैन दर्शन के महान ग्रंथों तत्त्वार्थ सूत्र एवं छह ढाला का गहन स्वाध्याय कराया। इसके उपरांत अपनी मंगल देशना में मुनि श्री ने सम्यक् चारित्र, आत्म-कल्याण और कर्म सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए वीतरागता का संदेश दिया।
मुनि श्री आगम सागर जी ने कहा कि जो जीव बाहरी सांसारिक पदार्थों से अपना ध्यान हटाकर स्वयं की आत्मा में स्थित हो जाता है, वही वास्तव में निश्चय चारित्र है। जिसे स्वयं के आत्म-तत्त्व पर सच्चा विश्वास होता है, वही उसे प्राप्त करने का पुरुषार्थ करता है, और आत्म-तत्त्व को पाने का प्रयास केवल वही कर सकता है जिसे आत्मा का सम्यक् ज्ञान हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिससे आत्मा का वास्तविक कल्याण हो, वही सम्यक् चारित्र है।
जो जीव ख्याति, लाभ, पूजा, भव्य भवन, वस्त्र और धन-संपदा की लालसा से ऊपर उठ जाता है, वही आत्म-कल्याण का अधिकारी बनता है। ख्याति, पूजा और लाभ चाहने से नहीं मिलते, बल्कि पूर्वकृत पुण्य कर्मों के उदय से स्वतः प्राप्त होते हैं। इसके विपरीत ईर्ष्या, द्वेष और क्लेश भाव रखने से जीव अपने कर्मों को मलिन कर लेता है।

मुनि श्री ने तत्त्व-श्रद्धान पर बल देते हुए कहा कि जीव को जीव और अजीव को अजीव मानना चाहिए। जो वस्तु जैसी है उसे वैसा ही स्वीकार करने से जीव पापों से बचता है, जबकि विपरीत मान्यता रखने से पाप का बंध होता है। उन्होंने आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक संदेश देते हुए कहा कि दो स्थानों पर बिना बुलाए भी जाना चाहिए—पहला किसी की काठी (शव यात्रा) में और दूसरा जिनेन्द्र भगवान के दरबार में।
प्रभु के दरबार में जाने से सदैव कल्याण ही होता है। यदि श्रद्धा सम्यक् हो जाए तो मोक्ष की मंजिल दूर नहीं रहती। ख्याति, पूजा और लाभ की इच्छा आत्मा की सबसे बड़ी व्याधि है; मोक्ष मार्ग का अपना निश्चित रास्ता है, जिस पर सही दिशा में चलने वाला ही सिद्धि प्राप्त करता है।
आज प्रतिदिन की भांति प्रातःकाल मूलनायक भगवान का भव्य जिन-अभिषेक एवं विश्व शांति हेतु वृहद शांतिधारा संपन्न हुई। जिसमें आज त्रिकाल चौबीसी में भगवान विराजमान करने वाले श्रीमती सरिता जैन, श्रेयश जैन (बालू), श्रीमती रुचि जैन, वंशिका जैन, निर्वि जैन (टैगोर नगर) परिवार को मूलनायक भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। तथा मूलनायक भगवान के समक्ष अभिषेक जैन, श्रीमती शालिनी जैन, सर्वम जैन प्रोफेसर कॉलोनी को शांतिधारा करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।

तत्पश्चात पूज्य मुनिराजों एवं एलक श्री की नवधा भक्ति पूर्वक आहारचर्या संपन्न हुई। पूज्य मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज एवं मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज को आहारदान देने का सौभाग्य श्रीमती शकुंतला देवी-राजकुमार जी एवं श्रीमती कविता मोदी,नवीन मोदी को प्राप्त हुआ।
पूज्य एलक 105 श्री धैर्य सागर जी महाराज को आहारदान देने का सौभाग्य श्रीमती रीता-निर्मल जी जैन एवं श्रीमती आशु,जैन,नीरज जैन को प्राप्त हुआ। वहीं पूज्य एलक 105 श्री स्वागत सागर जी महाराज का आज व्रत का नियम रहा।
वर्षायोग समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज, बड़ा मंदिर मालवीय रोड रायपुर ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से प्रातःकाल समय पर पधारकर जिन-अभिषेक, शांतिधारा, मुनिराजों की आहारचर्या में नवधा भक्ति एवं गुरुमुख से जिनवाणी का पीयूष पान कर जीवन सफल बनाने का आव्हान किया है।

