पाप की रफ्तार तुरंत हटाकर धर्माचरण की रफ्तार बढ़ाने पर ही धर्म का फल मिलेगा- श्री विनय मुन

पाप की रफ्तार तुरंत हटाकर धर्माचरण की रफ्तार बढ़ाने पर ही धर्म का फल मिलेगा- श्री विनय मुन

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 6 सितंबर।

आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए आज का विषय धर्म का फल तुरंत मिले पर कहा इस पर हमारी देव गुरु पर अटूट श्रद्धा रख कर धर्म धारण करके धर्माचरण की रफ्तार बढ़ायेंगे तो धर्म का फल तुरंत मिलेगा।


( सच्चा धर्म अमूल्य परिवर्तन कराता है )
म सा ने धर्माचरण पर चलना तभी संभव है जब गुरु ज्ञान पा लेंगे तभी सच्चा बौध आयेगा इसके लिए मन को शास्वत बनाना होगा मन शास्वत के लिए भौतिक गुणो को छोड़ कर तिजोरी को नोटों से न भरकर न धन संबंधी अंबार लगाना हमें शास्वत गुण प्राप्त करना है,यह वैज्ञानिक धर्म है इसे जो भी श्रद्धा से स्वीकार किया उसका जीवन अमूल्य परिवर्तन हो गया।आज श्रद्धालु को धर्म का ऐसा फल तुरंत मिलना चाहिए इस हाथ लो उस हाथ दो।


( पाप को छोड़ पुण्य की रफ्तार पकडे )
म सा ने कहा तुरंत फल के लिए पाप के कामों को तुरंत रफ्तार से छोड़ना होगा,धर्म का दिल में विश्वास धर्म में उत्साह उमंग धर्म का जोश जुनुन होने पर धर्म का फल हमे तुरंत मिलेगा,किसी बात पर हमें नेगेटिव प्रतिक्रिया नहीं करके पोजेटिव प्रतिक्रिया तुरंत करनी होगी,पैसे का ममत्व हटावे,गरीबों की हाय लेकर तिजोरी नहीं भरे,किसी प्रकार का परिग्रह नहीं करे,अपने भीतर झांके,मन में उथल पुथल नहीं हो।

(पुण्य की जड़ पाताल से पाप की जड़ अस्पताल से)
म सा ने कहा पुण्य की जड़ पाताल से व पाप की जड़ अस्पताल मे नजर आने लगती है अस्पताल का वातावरण देख कर हमारा रोम रोम दुखी हो जाता है इन सबसे बचने के लिए हमें अहिंसा देवी की अराधना करनी होगी उसके लिए हमें एकाग्रता लाने के लिए शुद्ध सामायिक से साधना में बैठकर भीतर में देखे ममत्व हटाकर मन संतुलित करने पर एकाग्रता आ जायेगी‌,पांच महाव्रत धारी परिवार को छोड़कर अपरिग्रह नहीं कर सकता,दुकान जाने से पहले पेढ़ी को धोका लगाते समय यही विचार मन में आते नैतिकता ईमानदारी रख सकूं।


( बुद्धि समय अनुसार बदल जाती हैं )
इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने कहा हमारी सोच बुद्धि समय के प्रभाव से बदलती जाती है भगवान ऋषभदेव के समय अलग थी आज के समय अलग होती जा रही है, धर्म शक्ति से काम करने पर जीवन अपने आप बदल जाता है। धर्म में कोई भी व्यक्ति ऊंचा नीचा नहीं होता, पयुर्षण पर्व आ रहा है बच्चों को धर्म की प्रेरणा देकर उनको मजबूत बनावें।


( अपने विचारों को अच्छा बनावें )
इससे पहले महासती श्री पराग श्री जी म सा ने जीवन पर कहा जिन्दगी की परिभाषा जन्म और मृत्यु के बीच का जो जीवन जीया जाता वो ही जीवन है, मनुष्य जन्म दुर्लभ है अपने विचारों को अच्छा बनावें विचारों को बांधे, नेगेटिव विचार स्वंय व साथ वाले भी परेशान होते हैं।आज लोग किसी भी घटना को दुसरे पर डाल देते न।


महामंत्री धर्मीचंद ओस्तवाल ने कहा मंगलवार से पर्युषण पर्व शुरू हो रहा है ज्यादा से ज्यादा धर्म तप त्याग करने का लक्ष्य रखे प्रवचन का समय 8.30 से 10.30 तक चलने की संभावना रहेगी, पयुर्षण पर्व पर आठ दिन अलग अलग विषय पर प्रवचन होगा व अखंड नवकार मंत्र का जाप सांयकाल सूर्यास्त बाद प्रतिक्रमण पौषध संवर होगा।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।


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