ब्यावर राजस्थान: अच्छे श्रोता बने सुनने के बजाय जीवन में उतारे- श्री विनय मुनि

ब्यावर राजस्थान: अच्छे श्रोता बने सुनने के बजाय जीवन में उतारे- श्री विनय मुनि

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 7 सितंबर ।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए आज का विषय का सार जिनवाणी सुनो अंदर में उतारो,हमको धर्म और जिनवाणी का मर्म समझना चाहिए,यह जीव कर्म हीन है,कर्म सत्ता हमें कहां से कहां तक पंहुचा देती है।हमें कर्मों से बचने के लिए किसी से भी जैलेक्सी की भावना नहीं रखें न किसी के साथ विश्वास घात करें न धोका धडी करनी चाहिए।


इससे पहले म सा ने भजन से कहा प्रभु वीर ने संदेशा सुनाया जिनवाणी का ठाट लगाया,सभी जीवों को मार्ग बताया सब कर्मों से उनको छुड़ाया,सत्य अहिंसा को पालो पाप परिग्रह को पालो,हमें अच्छे श्रोता बनना है,सुनना सरल जीवन में उतारना कठिन उसी का महत्व होता है,तीन तरह कै श्रोता होता है एक सुनकर हृदय में उतारे,एक सुनकर वापस सुनाता है एक इस कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देता उसकी कोई वैल्यू नहीं रहती।भजन से सुनाया जय जय बोलो अनाथि मुनिराज की सौंधी जगाई मगध महाराज की।


म सा ने धर्म कथा पर भजन के मार्फत समझाया उदयवीर की कथा सुनो नर नारी पद्मावती के पुत्र बड़े श्रेयकारी।जब राजा ध्वल को अपने मंत्री ने उनके चरणों में गिर कर कहा मुझे माफ़ कर दो आपकी आज्ञा पुरी नहीं कर सका हजूर राजा ने मंत्री को उठाकर गले लगा लिया जैसे राम भरत का मिलान हुआ,सत्य जानकर राजा व पूरी प्रजा मंत्री की जय जय कार करने लगे उनका इक्कीस दिन बाद राजा का अनशन समाप्त हुआ।
कल मंगलवार से पर्युषण पर्व शुरू हो रहे हैं ज्यादा से ज्यादा धर्म ध्यान तपस्या करके आत्मा की शुद्धि करें।


इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने कहा धर्म में क्रिया से ज्यादा भावना का महत्व होता है,ऐसा कोई स्थान नहीं जहां मुक्ति नहीं मिली हो,भावना जितनी शुद्धि होकर निरंतर बढ़ती जितनी उतनी ही बुद्धि बढ़ती जाती। भावना से जुड़े पर अतिभावना से नहीं जुड़े, द्रव्य के साथ भाव का महत्व होता हैं।
म सा ने कहा भगवान महावीर का सिद्धांत पूरे विश्व में जियो और जिने दो का डंका बजाया आ रहा है। व्यक्ति जितना त्याग मार्ग पर चलेगा उतना सुखी बनेगा।


श्रावक जीवन साधना का ब्याज है,हमें संसार के सभी भोगो से दूर रहना है,भजन से कहा सुख दुख एक समाना रे,बहुश्रुत जी जैसा परमानंद पाना रे, अयोध्या में घोषणा कर दी श्री राम को राजा बनाया जायेगा पर कर्मों का भोग वन में जाना पड़ा।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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