ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 8 सितंबर।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज पयुर्षण पर्व के पहले दिन खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए आज का सरलता की सेज और दुःख से परहेज के विषय पर कहा इस पर्व को अपने आप को सरल बनावें,सरलता है तो धर्म है आत्मा का निजि गुण है।कपट है तो आत्मा विकार बन जाती है,टेढ़ा मेढा होने पर अपनी जीन्दगी को टेढ़ा मेढा कर दिया।
म सा ने इससे पहले भजन से पयुर्षण लाग्या अब तो सगला जागो..पर्वों का देश में पर्व मानव समाज में एक नहीं लहर लेकर आता है यह लोकोत्तर का संस्कार करता है इस पर्व में अपनी पांचों इंद्रियों को हटाकर आत्मा में लीन हो जाते हैं,यह एक पयुर्षण पर्व ऐसा है जो आत्मा को पावन बनाता है जो पिछले साल से हमारे दिल दिमाग में प्रदुषण बढ़ गया उसको कैसे निकाला जाए व्यक्ति तनाव हटाकर शांति की जिंदगी जी कर मानसिक प्रदुषण को दूर कर देता है।
हमें स्वयं को सरल सहेज बनाना है माया और कपट पर विजय पानी होगी,जितनी कुटिलता जटिलता होने से व्यक्ति महाभारत खड़ी कर देता, धर्म के मर्म को समझें, सज्जन बन कर नेगेटिव बनें।जब जब स्वाध्याय चलता है तो देवो का विमान रुक जाता है,आज जैन परिवार में जैनेत्व का संस्कार कहां जा रहा इस पर सोचे,कैंची नहीं बनकर सूई बनकर दिखाना होगा।
इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने अन्तिम दशाओं के अध्ययन का वर्णन सुनाया समझाया।जन्म भी दुख मृत्यु भी दुख बीच का रास्ता जीवन का होता उसमें सुख भी है दुख भी है,सबकी अपनी अपनी प्रतिक्रिया होती है,हम मनुष्य गति से अपनी आत्मा को पर गति मे लेकर जाना ही सुख प्राप्त करना होता है।पाप करने से धर्म की वाहवाही खत्म हो जाती है और आत्मा नीच गती में चली जाती हैं।
महासती श्री पराग श्रीजी म सा ने कहा इस आठ दिनों का पर्व में आत्मा जाग्रत होनी चाहिए ताकि सच्चाई पता चल जाता सके आत्मा जागती है या वापस से सो जाती ऐसा नहीं हो, कर्मों को बांधना बहुत सरल हे इसकी वजह से आत्मा कहा कहां भटक रही है यह पता नहीं रहता,पूर्व भव की सोचते नही वर्तमान को देख देख कर दुखी होते जा रहे हैं।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

