ब्रह्माकुमारीज़…. देशभर से 1500 से अधिक पत्रकार ले रहे भाग… अपनी आंतरिक शक्ति को मजबूत करना ही आध्यात्मिक सशक्तिकरण है: डॉ. मित्तल

ब्रह्माकुमारीज़…. देशभर से 1500 से अधिक पत्रकार ले रहे भाग… अपनी आंतरिक शक्ति को मजबूत करना ही आध्यात्मिक सशक्तिकरण है: डॉ. मित्तल

  • मान सरोवर में चार दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन जारी

आबूरोड(अमर छत्तीसगढ़) 12 सितंबर । ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मान सरोवर परिसर में चल रहे राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन के तीसरे दिन द्वितीय पूर्ण सत्र में आध्यात्मिक सशक्तिकरण द्वारा मीडिया मानकों का उन्नयन विषय पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान वक्ताओं ने पत्रकारिता में आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिकता, सकारात्मक दृष्टिकोण और आंतरिक सशक्तिकरण की भूमिका पर अपनी बात रखी। बता दें कि सम्मेलन में देशभर से 1500 से अधिक मीडियाकर्मी भाग ले रहे हैं।


देहरादून के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. दीन दयाल मित्तल ने कहा कि आध्यात्मिक सशक्तिकरण का अर्थ अपने कार्य को करते हुए भीतर से सशक्त और जागरूक रहना है। विकारों को दूर करते हुए अपनी आंतरिक शक्ति को मजबूत करना है। हमारी पहचान सिर्फ भौतिक शरीर और काम तक सीमित नहीं है, वास्तव में हम सभी एक आत्मा हैं। आत्मा में मूल सात गुण और अष्ट शक्तियां विद्यमान हैं।

राजयोग साधना से हमारे अंदर अष्ट शक्तियों का विकास होता है। स्वयं को जानना ही आध्यात्मिक चेतना है। परमात्मा ही दुनिया के नियंता हैं। मीडिया में तथ्यता, सटीकता, निष्पक्षता और सत्यता मूल मानक हैं। पत्रकारिता में समाचार के स्रोत की गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है और खबर के स्रोत को किसी खतरे में नहीं डालना चाहिए।

यहां आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस होती है-
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रमुख डॉ. कुंजन आचार्य ने कहा कि वेद और ग्रंथों में आध्यात्मिकता की बात कही गई है। ब्रह्माकुमारीज़ के परिसर में आकर हमें एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस होती है। मीडिया में तमाम प्रतिस्पर्धा के बावजूद हमें अपने मूल्यों, सिद्धांतों को बनाकर रखना होगा। पत्रकारों का आंतरिक सशक्तिकरण और मूल्यनिष्ठ दृष्टिकोण मीडिया की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

संवेदनाओं को सबसे ऊपर रखें-
रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार विशाल यादव ने कहा कि हम एक पत्रकार होने के साथ-साथ एक इंसान भी हैं। इसलिए रिपोर्टिंग करते समय मानवीय संवेदनाओं को सबसे ऊपर रखना होगा। जहां कहीं आपकी मदद, प्रयासों और कलम से किसी व्यक्ति का कल्याण हो सकता है तो उसके लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। मैं व्यक्तिगत स्तर पर लोगों के हित और न्याय के लिए जो भी बन पड़ता है मदद करता हूं।

सादगी, पवित्रता और शांति से बदल जाएगा जीवन-
माईगव इंडिया नोएडा के सामग्री एवं वितरण प्रबंधक उदय चंद्र सिंह ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ पूरे विश्व में शांति का संदेश दे रही है। सफेद रंग शांति का प्रतीक है। यदि हम सभी पत्रकार ब्रह्माकुमारीज़ के तीन संदेश- सादगी, पवित्रता और शांति को जीवन में धारण कर लें तो मीडिया का स्वरूप बदल जाएगा। मध्यप्रदेश विधानसभा पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राधा वल्लभ शारदा अध्यात्म का पहला पाठ विश्वास है। आज से 90 वर्ष पहले ब्रह्मा बाबा ने इस महान संस्थान की नींव रखी जो आज पूरे विश्व के 140 देशों में शांति और अध्यात्म का संदेश दे रही है। जयपुर की प्रसिद्ध लेखिका नीता जोशी ने कहा कि सिर्फ व्यू पाने के लिए समाज में गलत संदेश देता समाज के हित में नहीं है। जब हम अध्यात्म से जुड़ते हैं तो हमारे अंदर सेल्फ अवेयरनेस बढ़ती है।

खबर का समाज का क्या असर होगा यह सोचना होगा-
आईटीएम विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलसचिव डॉ. ओमवीर सिंह ने कहा कि कोई भी खबर के वायरल करने के पहले यह जरूर सोचें कि उसका समाज पर क्या असर होगा। क्या हमारी खबर से समाज का हित होगा। समाज को कुछ सीख मिलेगी। खबर बनाने से ज्यादा खबर को जिम्मेदारी के साथ पेश करना जरूरी है। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार ने कहा कि मीडिया के साथी अपनी कलम के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा सकारात्मक खबरों को बढ़ावा दें। बिना आध्यात्मिक सशक्तिकरण के हम मीडिया में मूल्यों को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं।

मीडिया को अपनी जिम्मेदारी खुद समझनी होगी-
एसएवीपी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय इंदौर की सहायक प्रोफेसर डॉ. वंदना जोशी ने कहा कि मीडिया यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि समाज जो देखना और पढ़ना चाहता है, हम वह कंटेंट परोसते हैं। मीडिया समाज के सामने जो कंटेंट पेश करेगा वह उसे देखेंगे, सुनेंगे और पढ़ेंगे। इसलिए मीडिया को अपनी जिम्मेदारी खुद समझनी होगी। संचालन जबलपुर की बीके विनिता बहन ने किया। डॉ. बीके सुनीता बहन ने सभी को राजयोग मेडिटेशन का जीवन में महत्व बताते हुए गहन शांति की अनुभूति कराई।

सांस्कृतिक संध्या में बांधा समां-
रात में सम्मेलन में सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई। इसमें जबलपुर से आए कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि बीके विवेक भाई ने संचालन किया।

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