सफलता पहचान देती है, परिवार अपनापन देता है—ब्रह्माकुमारी चक्रधारी दीदी रशिया..

सफलता पहचान देती है, परिवार अपनापन देता है—ब्रह्माकुमारी चक्रधारी दीदी रशिया..

भिलाई(अमर छत्तीसगढ़) , 21 सितंबर 2026, छत्तीसगढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के उपलक्ष्य में सेक्टर-7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में “आंतरिक शक्ति से सशक्त नारी—विश्व शांति की शिल्पकार” विषय पर भव्य महिला महासम्मेलन का आयोजन किया गया।

सफलता पहचान देती है, परिवार अपनापन देता है—ब्रह्माकुमारी चक्रधारी दीदी..
रशिया के सेवा केंद्रों की निदेशिका एवं महिला प्रभाग की राष्ट्रीय अध्यक्षा राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी चक्रधारी दीदी ने कहा कि “सफलता पहचान देती है, जबकि परिवार हमें अपनापन देता है।” उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति भीतर से अशांत होता है तो उसकी कार्य करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। हमारे विचार ही हमारी ऊर्जा हैं और हमारे संकल्पों से ही हमारी सृष्टि का निर्माण होता है। इसलिए मन को सकारात्मक एवं शांत रखना जीवन की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सर्वप्रथम मंचासीन अतिथियों द्वारा कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया गया। शांति किसी स्थान में नहीं, हमारे विचारों में है*
डॉ. सविता बहन ने कहा कि शांति पाने के लिए हम पहाड़ों या समुद्र के किनारे चले जाते हैं, लेकिन यदि परिवार के किसी सदस्य के संबंध में कोई गलत समाचार मिल जाए तो मन की शांति तुरंत गायब हो जाती है। इससे स्पष्ट है कि शांति का संबंध स्थान और परिस्थितियों से नहीं, बल्कि हमारे मन और विचारों से है।

कार्यक्रम का सुंदर मंच संचालन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्राची दीदी द्वारा किया गया। 

 कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रीमती रजनी बघेल, श्रीमती रिचा सेन, जिला जनपद अध्यक्ष लता साहू, बी.एम. शाह हॉस्पिटल की निदेशिका लता शाह, चेंबर ऑफ कॉमर्स भिलाई की महिला अध्यक्ष श्रीमती सुमन कन्नौजी, श्रीमती तुलसी साहू, असिस्टेंट कमांडेंट छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्सेस 7वीं बटालियन प्रज्ञा मेश्राम, स्वीटी कौशिक, पतंजलि योग केंद्र की जिला प्रभारी श्रीमती ममता साहू, इनर व्हील क्लब की अध्यक्ष निधि देशलहरे, उषा बारले, रजनी रजक, लायंस क्लब से रोज लीना, सहकार भारती की महिला अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ महिला मंडल की स्मिता दौड़के, श्रीमती अमनदीप कौर सहित अग्रवाल महिला समाज, देवांगन समाज, गुजराती समाज एवं अन्य सामाजिक संगठनों से जुड़ी महिलाएं उपस्थित रहीं।

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