ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 21 सितंबर ।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे गुरु भगवंत उपाध्याय प्रवर को वंदन के बाद अपनी अमृत देशना देते हुए भजन से बताया जग जा रे चेतन जगने में सार है जगने में सार है,जग गयी दुनिया हुई भव पार है, व्यक्ति शरीर की मन इन्द्रियों को आत्मा मान बैठा क्योंकि उसको भेद विज्ञान मालुम नहीं हुआ हमें सबसे पहले भेद विज्ञान को सिखना होगा जो अनुभव की पाठशाला में मिलेगा उसमे गुरुओं द्वारा सिखाया जाता है उन्हीं की वजह से हमें अनुभूति ज्ञान प्राप्त हो जाता हैं।
(प्रशंसा बाधक है)
म सा ने कहा जो इस दुनिया में अपने लिए सुनना चाहता कोई मेरी प्रशंसा करें वाह वाही करें तो उसका चेहरा खिलता नजर आयेगा,अगर नींदा कर देता तो मन संतुलित नही होगा,प्रशंसा करता मेरे लिए बाधक है नींदा करता वो सच्चा हितेशी होता हैं। जिसने धर्म का मर्म समझ में आ गया तो उसको जीवन जीने का आनंद आ गया,विचारों को निर्मल बना लिया। धर्म कथा पर बताया श्री रानी ने नर्क में जाकर वापस नागिन के रूप में आकर जहर उगलने लगी और बेर मिटाने की जरूरत पड़ने लगी।
(अपनी सोच सकारात्मक बनावें)
म सा ने कहा आज व्यक्ति जब चाहे जब डिप्रेशन में चला जाता है और तनाव में आ जाता है वहीं से क्रौध की शुरुआत हो जाती जो मुर्खता है,क्रौध की शुरुआत होती है मुर्खता से क्रौध का समापन पश्चाताप से होता है हमारे मन को तनाव रहित बनाने व विचार निर्मल बनाने के लिए अपनी सोच को सकारात्मक बनावें तनाव रहित बनावें। उसके लिए पहले स्वाध्याय फिर ध्यान साधना के लिए एकाग्रता से एकांत में जाकर सत्संग बैठ जाएं।सम्यक दृष्टि भाव जागृत होने से तीसरा नेत्र खुल जाता है।
ज्ञ इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने कहा अनिती चीजों का स्वीकार करना हमारे लिए बेकार है क्योंकि अनिति का अहंकार दुर्गति में लेजाता है।ज्ञान के साथ विवेक होना जरूरी है।आगम है क्या आगम अपनी आत्मा के भीतर जाना।जीवन में संतोष आया की नही आया, संसार को पकड़ना जब चाहे छोड़ना कोई नहीं चाहता, मनुष्य की सोच रही 50 के ऊपर होऊंगा जब धर्म कर लुंगा,हम लोग क्षत्रिय हैं मन में उत्साह जोश की कमी नही बस सयंम लेने की जरूरत है,लोग्गस भक्तामर के पाठ करने से चमत्कार की आशा कर लेते है वह चमत्कार नहीं करता सा उनका श्रद्धा से पाठ करना चाहिए।वीतरागता का सुख सयंम का सुख आनंद दिलाता हैं।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

