‎कैसी भी परेशानी आये,अपने मार्ग पर डटे रहें – समयप्रभ जी

‎कैसी भी परेशानी आये,अपने मार्ग पर डटे रहें – समयप्रभ जी



‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 22 सितम्बर। ” स्थिति अनुकूल हो या प्रतिकूल, वह साधक की कसौटी के लिए आती है। कोई भी परेशानी आ जाए तो भी हमें अपने मार्ग से डिगना नहीं चाहिए !” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य समयप्रभ सागर जी ने  व्यक्त किए।
‎              मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्ल्भ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री समयप्रभ सागर जी ने फरमाया कि हम अपने मार्ग में अडिग रहते हैं तो हमें सफलता अवश्य मिलेगी। उन्होंने कहा कि आपका कुछ ना कुछ संकल्प होना ही चाहिए और इस संकल्प को पूरा करने के लिए हमें लग जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप की शक्ति में गर्मी है। इस शक्ति का फायदा उठाइए। अपने संकल्प को पूर्ण करने में इसे लगाइए।


‎ मुनि श्री समयप्रभ जी ने कहा कि हमारे शरीर के भीतर परिवर्तन होते रहता है। यहां तक कि 21 से 40 दिन के भीतर खून भी बदल जाता है। हमारे शरीर में हजारों नाड़ियां हैं और इन्हें हमें नियंत्रित करना है तभी हम अपने उद्देश्य की ऒर आगे बढ़ पाएंगे। ट्रेंड व्यक्ति और अनट्रेंड व्यक्ति के काम में बहुत फर्क होता है। भाव बदलने से यात्रा का स्वरूप ही बदल जाता है।

हमारा जो मोटिव है, उस तरह का हमारा कृत्य नहीं है। हमें अपने मोटिव को पूरा करने के लिए वैसा कृत्य करना पड़ेगा।
‎ मुनि श्री समयप्रभ जी ने कहा कि तत्वों का ज्ञान बोरिंग विषय है किंतु जब लोग इसे समझने लगते हैं तो फिर वे इससे बाहर नहीं निकलना चाहते। साधक तत्वज्ञान की साधना करते-करते उसमें पूरी तरह डूब जाता है।

तत्वज्ञान के आनंद की अनुभूति होने लगे तो फिर जीवन भर किसी अन्य आनंद की जरूरत ही नहीं पड़ती। मुनिश्री ने कहा कि आप एक माला का ही ध्यान करो परंतु निश्चित स्थान में और निश्चित समय पर करोगे तो आपको अद्वितीय आनंद का एहसास होगा।

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