मनुष्य होते हुए हम पुण्य वाणी क्यों नहीं बांध रहे – श्री विनय मुनि जी

मनुष्य होते हुए हम पुण्य वाणी क्यों नहीं बांध रहे – श्री विनय मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 23 सितंबर ।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे गुरु भगवंत उपाध्याय प्रवर को वंदन के बाद अपनी अमृत देशना फरमाते हुए कहा मोह ममता में सब कुछ खोया अब जाग जाओ मन जीवन में जग गयी दुनिया हुए भव पार,सच्चा सुख प्राप्त करना है तो वो हमारी आत्मा के अंदर मिलेगा शरीर मे सुख की खोज करना अज्ञान का आवरण होता उसको हटाने के लिए हमें ग्रंथों को उठाकर देखे उसमें कई उदाहरण मिल जायेगा।


म सा ने कहा धर्म का महत्व नहीं समझने वाला धर्म की अपेक्षा कर देता हैं, भगवान महावीर का चरित्र आत्मा में सुख दिलाता हे उनके मुंह से निकलने वाला वचन खाली नहीं जाता वह सत्य होता है।सदा आत्मिय बल कहां से कहां पहुंचा देता है। मनुष्य होते हुए हम पुण्य वाणी को बांधने का काम नहीं कर पा रहे लंदन, जितना ज्यादा पुरुषार्थ करेंगे जितनी मेहनत करेंगे उतना पसीने के साथ शरीर की गंदगी बाहर निकल जायेगी। इंसानियत रहेगी तो मानवता रहेगी।


इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने कहा एक मात्र मनुष्य भव है जो मनुष्य दुख दूर कर उसका चिंतन कर सकता है।दुख मैं और मेरा पन के कारण होता है,दुख होने के ओर भी कई कारण हैं छोटी छोटी बातों से स्वयं दुखी दुसरे को दुखी कर देते हैं,दुख उत्पन्न का कारण लोभ में भरे होना लोभ देखने में, सुनने में होता है खाने में लोभ होता है।देखने में अन्नत दुख उत्पन्न होयेगा जीवन में मोह दुख देने का कारण बनता है।संसार में जितना सुख वह धोका देने वाला होता हैं।


म सा ने बताया सुखी होना है तो मोह को छोड़ना पड़ेगा,अंदर मोह सुखी भी है शत्रु भी है असली सुख सयंम में मिलता है। परिणाम सुख का कारण दुख का कारण बन जाता है, छोटी छोटी चीजें दुख दे जाती हैं।साधु जीवन उदारता का जीवन है,सच्चा सहयोगी संसार से मुक्त करवा देता है। ग्रहस्थ आग का गोला है,मन से आज लोग पागल होते जा रहे हैं। मनुष्य जन्म दुर्लभ है जिनवाणी सुनना उससे दुर्लभ है,और जिनशासन पर श्रद्धा रखना उनसे भी दुर्लभ होता हैं।


संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर ।

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