ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 5 अक्टूबर।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा ने आज समता भवन प्रवचन हाल के प्रांगण मे गुरु भगवंत उपाध्याय प्रवर को वंदन करने के बाद अपनी ओजस्वी वाणी से अमृत देशना देते हुए कहा हमें हुकमीचंद नहीं बनना ने रायचंद बनना न ज्ञानचंद बनना चाहिए।ईष्या की अग्नि में नहीं जलना अधर्म व्यापारी दुष्ट व्यक्ति से बचकर रहना क्योंकि दुष्ट व्यक्ति सारे समुद्र के पानी को दुषित कर देता हैं।
(वीर व्यक्ति वीरता का काम करता)
म सा ने उदयवीर की धर्म कथानुयोग पर कहा वीर व्यक्ति ही वीरता का काम कर सकता है,जब तक वीरता नहीं आयेगी तब तक वीरता का काम नहीं कर सकता, पुण्य वाणी का पुंज का चरण पड़ते ही पुण्य वाणी प्रबल हो जाती है हर कोई उसका साथ दे देता कमजोर होने पर मुनिम का साथ सेठ दूर हो जाता है,धर्म का उपदेश पब्लिक प्रवचन में होना चाहिए।जब व्यक्ति वितर्क में उतर जाता तो विवाद होगा ही होगा, पुण्य वाणी से दुसरे की आलोचना करने पर मिठास आती है,पुण्य वाणी की आलोचना करें।घर के सदस्यों को पता नहीं किसकी पुण्य वाणी से मिल रहा हैं।
(साधना में मन रमा लो खोयी शक्ति को जगा लो)
इससे पहले म सा भजन से कहा साधना में मन को रमा लो रमा लो,कोई हुई शक्ति को जगा लो जगा लो,बड़ा सुनहरा मौका आया मानव तन मन पुण्य योग पाया,समय पर अभी हम फिर नहीं आते काल का चक्र कभी घुम जाए, इसलिए जागरण का नाम गुंजा लो कोई शक्ति को जगा लो,साधना की बात आयी है साधना में मन लगा दो तभी खोयी शक्ति जाग जायेगी, शक्ति में ज्ञान विज्ञान नहीं होगा तो व्यक्ति उसे कमजोर समझेगा, धैर्य का धागा टूट जायेगा इस धागे को मजबूत बनाना होगा।
(जितनी पात्रता उतनी योग्यता)
म सा ने कहा एक को स्वर एक को पर जानने के एक जगत को जानने के लिए सयंम को जगाने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।जो स्वयं को नहीं जाना उसका ज्ञान अधूरा है,वह व्यक्ति मिथ्या दृष्टि होगा जो दुनिया को देखने में लग जायेगा,आज लोग ज्ञान चंद जी बनकर बहुत घुमते जा रहे हैं वो समझता हे मेरा ज्ञान सर्वश्रेष्ठ है परन्तु वो ज्ञान अधुरा होता है ज्ञान के पहले केवल लग जाने से केवल ज्ञानी नहीं बन सकता, अधुरा ज्ञान सदा दुख देता है में यह कर दूंगा वो कर दूंगा जितनी पात्रता होगी उतनी योग्यता होगी।
(चरित्र आत्मा के सामने हुक्मचंद नहीं बने)
म सा ने कहा लोग हुकमीचंद बन कर हुक्म नहीं चला सकते, चरित्र आत्मा के सामने नम्र विनम्र बन कर रहना होगा, हुक्मचंद बनकर नहीं रहें।म सा ने रायचंद पर समझाया हमें रायचंद नहीं बने भगवान का दरबार है संघ का अधिकार है राय देने से पहले सोच ले मेरी औकात कितनी है बडे से बडा व्यक्ति की राय में अगर वजन नहीं तो वो राय कुछ काम की नहीं अधुरी जिज्ञासा व्यक्ति को तरसाती है पूरी जिज्ञासा व्यक्ति को हंसाती है,एक व्यक्ति के पीछे नहीं रहे वो सोचता है संघ मेरे पीछे है पर गलत सोचता है क्योंकि वह स्वयं का नुक़सान के साथ दुसरो का नुक़सान करा देता है।
(रोम रोम से निकले गुरु वर नाम तुम्हारा)
इससे पहले राम गुरु की राम सेना के श्री रामगिरी जी म सा ने भजनों की पंक्तियां से बताया जिया कब तक उलझेगा संसार विकल्पो में कभी जन्म का दुख पाया कभी मरण का दुख पाया, भगवान महावीर ने चार तीर्थ की स्थापना करी जो प्राप्त है वो प्रयाप्त है, धन्य धन्य क्षण वो कब आये जब भीतर में वैराग आवे।रोम रोम से निकले गुरु वर नाम तुम्हारा हा नाम तुम्हारा। गुरु भक्ति जीवन को सार्थक बना देती है उस पर श्रद्धा जरूरी है। गुरु भक्ति से अज्ञान का चश्मा दूर होकर ज्ञान का प्रकाश अंदर आ जाता हैं।
आज की धर्म सभा में छत्तीसगढ़ से दुर्ग रायपुर राजनांदगांव आदि क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति रही।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

