‎धैर्य यदि नहीं है तो मिलने वाली चीज भी‎हाथ से निकल जाती है -श्रेयांशप्रभ जी

‎धैर्य यदि नहीं है तो मिलने वाली चीज भी‎हाथ से निकल जाती है -श्रेयांशप्रभ जी


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‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 5 अक्टूबर । ” धैर्य होना जरूरी है। धैर्य यदि नहीं है तो मिलने वाली चीज भी हाथ से निकल जाती है। यदि हम कुआं खोदते हैं और हमें 80 फीट में पानी का स्त्रोत मिलाने वाला है किंतु 60 फीट में ही हमारा धैर्य खो जाता है तो फिर हम पानी के स्त्रोत को नहीं पा सकते।” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने  व्यक्त किए।
‎              मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्ल्भ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने फरमाया कि हमारे मन में धीरज रहना चाहिए। धीरज है तो समता है। इसलिए हमें हर परिस्थिति में धैर्यवान होना चाहिए। यदि कोई आपके धैर्य को तोड़ने का प्रयास करता है तो भी डटे रहिए, किसी भी हालत में धैर्य न खोयें। सब्र का फल मीठा होता है। भले ही फल मिलने में समय लगे लेकिन लाभ तो मिलेगा ही। जो सबके लिए करते हैं उन्हें ज्यादा फल मिलता है।
‎                      मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि किसी भी चीज तक पहुंचने के लिए एक निश्चित समय लगता है। अगर जल्दी पहुंचना है तो स्पीड बढ़ानी होगी। किंतु निश्चित समय में ही आप उस चीज को प्राप्त कर सकेंगे। घर यदि नहीं है तो मिलने वाली चीज भी हाथ से निकल जाएगी। हमारे शरीर में 32 लक्षण होते हैं और यदि पूरे के पूरे लक्षण किसी में होते हैं तो वह उत्तम व्यक्ति होता है। उन्होंने कहा कि मांग कर कोई भी चीज मिलती है तो मजा नहीं आता और छोटापन लगता है, लेकिन वही चीज बिना मांगे मिल जाए तो मजा ही आ जाता है।
‎** दादा गुरुदेव का इकतीसा शुरू
‎ चातुर्मास समिति के संयोजक पीयूष बैद ने बताया कि जैन बगीचा स्थित नेम भवन में आज से गुरु इकतीसा का पाठ शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि नेम भवन में प्रतिदिन रात्रि 8:00 से 9:00 बजे तक गुरु इकतीसा का पाठ होगा। उन्होंने धार्मिक जनों से इस अवसर पर उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
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