राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 15 अक्टूबर । खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य मौलिकप्रभ सागर जी ने कहा कि दीपावली में हम घर की और बाहर की सफाई कर रहे हैं किंतु हम अपने भीतर की सफाई कब करेंगे? जब तक आत्मा में चढ़ी मैल साफ नहीं होगी तब तक हम अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाएंगे! अभी भी समय है कम से कम अपने को और अपने लिए 24 घंटे में एक घंटे का समय अवश्य निकालिए और आत्म शुद्धि के लिए प्रयास करें।
मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री मौलिकप्रभ सागर जी ने कहा कि आत्मा अनंत गुणों की खान है, वह निरंतर यात्रा करती रहती है कभी नहीं थकती किंतु वह भी मोक्ष चाहती है। मोक्ष के लिए श्रद्धा, सम्यक ज्ञान एवं सम्यक चारित्र की आवश्यकता होती है। इनमें से यदि एक भी कम हुआ तो मोक्ष प्राप्त करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि संसार की आपाधापी कभी खत्म नहीं होगी। हमें 24 घंटे में से 1 घंटा अपने लिए तो समय अवश्य निकलना होगा तभी हम अपनी आत्मा शुद्धि के लिए कुछ कर सकेंगे।
मौलिकप्रभ सागर जी ने कहा कि हम जीवन भर दौड़ते रहते हैं किंतु हमें कुछ नहीं मिलता क्योंकि हमने जीवन भर अपने लिए कुछ नहीं किया,यदि कुछ किया होता तो हमारी यह स्थिति नहीं होती और हमें अंतिम समय में पछताना नहीं पड़ता। अभी भी समय है जागो! नहीं तो कुछ नहीं मिलने वाला।अपने लिए समय निकालो और आत्म शुद्धि के लिए प्रयास करो।

