‎हमें जो भी अच्छा मिलता है वह पुण्य का प्रताप है ‎समयप्रभ सागर

‎हमें जो भी अच्छा मिलता है वह पुण्य का प्रताप है ‎समयप्रभ सागर


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‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 19 अक्टूबर । ” हमें जो कुछ भी अच्छा मिलता है वह सब पुण्य का प्रताप है। हमें पुण्य से ही ज्ञान,आनंद और बहुमान मिलता है। किसी व्यक्ति को देखकर मन में जो सम्मान के भाव पैदा होते हैं,वही बहुमान है।” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य समयप्रभ सागर जी  ने  व्यक्त किए।
‎              मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्ल्भ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री समयप्रभ सागर जी ने फरमाया कि अच्छा खाना – पीना एवं आराम की जिंदगी जीना जानना यह सब पुण्य से प्राप्त होते हैं। ज्ञान भी पुण्य से प्राप्त होता है, आनंद भी पुण्य से प्राप्त होता है। सत्संग से पुण्य मिलता है और पुण्य से हमें मोक्ष मिलता है।
‎                मुनि श्री समयप्रभ जी ने कहा कि हमारा एकमात्र लक्ष्य मोक्ष होना चाहिए। हमारे कार्यों की कोई गलतियां निकलता है तभी तो हमें सीखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक बनो और व्यवहार को निभाओ। गलतियों को सुधारो और कोशिश करो कि गलतियों की पुनरावृति ना हो। उन्होंने कहा कि कब कैसे पापों का उदय हो जाए किसी को पता नहीं चलता। अहंकार हमें अंधकार की ऒर ले जाता है और हमारी सोच समझ को खत्म कर देता है। अंधकार और अहंकार को दूर करता है ज्ञान। ज्ञान हमें पुण्य से मिलता है। आप पुण्य कार्य करें और मोक्ष को अपना लक्ष्य निर्धारित करें। पुण्य को यदि पा लिया तो जीवन में आनंद ही आनंद है।
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