‎संयुक्त परिवार में लोग एक – दूसरे के प्रति समर्पित थे -समयप्रभ जी‎

‎संयुक्त परिवार में लोग एक – दूसरे के प्रति समर्पित थे -समयप्रभ जी‎


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‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 20 अक्टूबर । ” पहले संयुक्त परिवार होता था और लोग एक-दूसरे का दर्द समझते थे किंतु अब एकल परिवार का महत्व बढ़ गया है, लोग अपने ही परिवार में व्यस्त हैं।” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य समयप्रभ सागर जी  ने  व्यक्त किए।


‎              मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्ल्भ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री समयप्रभ सागर जी ने फरमाया कि पहले एक-दूसरे को समझने में सालों लग जाते थे और मां-बाप का भय भी होता था। पहले मां-बाप का एक अलग सम्मान होता था किंतु अब युवा अपना फैसला स्वयं लेते हैं।

संयुक्त परिवार में परिवार पर ही सारी जिम्मेदारी होती थी। लोग एक-दूसरे से खुशियां बांटते थे और एक-दूसरे के प्रति समर्पित रहते थे। एकल परिवार में यह स्थिति नहीं है। अब केवल लोग अपने ही परिवार को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।


‎ मुनि श्री समयप्रभ जी ने कहा कि संयुक्त परिवार में लोगों के पास निजी बातों के लिए समय नहीं होता था किंतु अब एकल परिवार में समय ही समय है। पहले नैतिकता ज्यादा थी,अब अनैतिकता ज्यादा बढ़ गई है। वर्तमान में हमारे मन में एक धारणा घर कर गई है कि वेस्टर्न कल्चर बहुत अच्छा है।

वेस्टर्न कल्चर के चक्कर में हम अपनी ही संस्कृति को भूल रहे हैं। यदि संस्कृति ही नहीं रही तो हमारा अस्तित्व क्या रहेगा? हमें अपनी संस्कृति का मान करना चाहिए। अपने फैसले पर हमें अटल रहना चाहिए और जो करना है उसे संजोकर,समायोजित करें। आप सही दिशा में आगे बढ़े और आपकी प्रगति हो।

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