दुर्ग में 13 भाइयों एवं 11 बहनों ने गुरु दस दिवसीय पर्युपाषणा शिविर में भाग लिया

दुर्ग में 13 भाइयों एवं 11 बहनों ने गुरु दस दिवसीय पर्युपाषणा शिविर में भाग लिया


दुर्ग,(छ. ग.) व्यसन मुक्ति के प्रणेता,परम पूज्य जैनाचार्य श्री रामलाल जी म. सा एवं वाचनाचार्य उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म.सा. के आज्ञानुवर्ति शासन दीपक श्री मनीष मुनि जी म. सा. एवम् श्रीश्रीमाल कुल गौरव, दुर्ग साधुमार्गी संघ से प्रथम सन्त श्री प्रणत मुनिजी म.सा. तथा महासती श्री हेमप्रभा श्री जी म.सा.आदि ठाना 4 के शुभ सान्निध्य में 16 अगस्त से 25 अगस्त तक दस दिवसीय पर्युपाषणा शिविर आयोजित किया गया जिसमें 12 वर्ष से लेकर 27 वर्षों तक के युवक युवतियों ने पूर्ण समर्पण भावों से भाग लिया।


पूज्य चारित्रात्माओं के अथक प्रयास एवं पुरुषार्थ ने शिविरार्थियों में उत्साह और उमंग का संचार किया, चारित्रात्माओं की प्रेरणा और शिविरार्थियों के समर्पण भाव ने इस शिविर को ंमील का पत्थर बना दिया। केन्द्र से प्राप्त पाठ्यक्रम के साथ ही अनेक सकारात्मक गतिविधियों से शिविर को रोचक एवं ज्ञानवर्धक, क्रियावर्धक बनाया। प्रतिकूलता में अनुकूलता का अनुभव करने वाले शिविरार्थियों ने प्रवचन के मध्य में अपने अनुभव साझा किए।


शिविर के अन्तिम दिन शिविरार्थियों ने नाटक के माध्यम से नरक गति की स्थिति और वर्तमान में सामाजिक एवं धार्मिक स्थितियों का वर्णन प्रस्तुत किया। तत्पश्चात शिविरार्थी भाइयों ने एक मुमुक्षु की दीक्षा का नाट्य स्वरूप प्रस्तुत किया। प्रस्तुतीकरण इतना प्रभावशाली और सजीव ढंग से प्रस्तुत किया गया था कि समता भवन महावीर कॉलोनी दुर्ग में बैठा हुआ प्रत्येक सदस्य हतप्रभ था ऐसा लग रहा था मानों गुरुदेव का वर्ष 2009 के दुर्ग चातुर्मास का 19 जुलाई का Seen Recreate हो रहा हो जब चलते प्रवचन में रतलाम के श्री चंद कोठारी ने दीक्षा ग्रहण की थी।

हर कोई बच्चों द्वारा प्रस्तुत ऐसा दृश्य और ऐसी शब्दावली और ऐसा आत्म विश्वास देखकर आह्लादित था, आनंदित था और हो भी क्यों न क्योंकि पुत के पग पालने में नज़र आने लगे हैं। आगामी पीढ़ी के बच्चे धर्म और चरित्रात्माओं के प्रति इतने समर्पित नज़र आ रहे हैं।

आज विदाई के क्षण का भी अदभुत नजारा था… शिविरार्थी एक दूसरे से दूर होने का अफसोस महसूस कर रहे थे… तो दूसरी तरफ चारित्रात्माओं से विगत दस दिन में हुई प्रत्येक त्रुटियों के लिए क्षमा याचना का प्रसंग उपस्थित कर रहे थे… घर परिवार और संघ के सदस्य भावुकता के साथ ही गर्व का अनुभव कर रहे थे… अब और शिविर लगाने की मांग आने लग गई है…
सभी चारित्रात्माओं के पुरुषार्थ और भागीरथी प्रयास की सराहना करते नहीं थक रहे थे… कुल मिलाकर गुरु के आयामों को आत्मसात करने का सुकून नज़र आ रहा था… सभी आत्मविश्वास से सराबोर थे… शिवरार्थी ने संघ के प्रति आभार व्यक्त किया कि सभी ने हमारा बहुत खयाल रखा ध्यान रखा…चारित्रात्माओं ने सभी शिविरार्थियों को मुमुक्षु शिविर में भाग लेने हेतु प्रेरित किया…
खट्टी मीठी यादों और ढेर सारा अनुभव लेकर शिवरार्थी अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए…
छत्तीसगढ़ी में नारा गुंजायमान हुआ
शिवरार्थी मन जावत है…
सुना सुना लागत है…

प्रेषक: शांतिलाल श्रीश्रीमाल दुर्ग

Chhattisgarh