‎दुनिया में आने जाने की मुसाफिरी तो चलती ही रहेगी-मौलिकप्रभ जी

‎दुनिया में आने जाने की मुसाफिरी तो चलती ही रहेगी-मौलिकप्रभ जी


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‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 2 नवम्बर। ” आपने काफी समय संसार को दिया है और इस संसार में आने जाने की मुसाफिरी तो चलती ही रहेगी। आपने दुर्लभ मनुष्य जीवन पाया है तो इसका लाभ उठाएं। सीरियल की दुनिया में ना डूबें। आप अपने लिए समय निकालें। आराधना दूसरे के दम पर नहीं होती। आराधना / साधना सिर्फ अपने दम पर ही होती है। “उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य मौलिकप्रभ सागर जी ने  व्यक्त किए।
‎              मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री मौलिकप्रभ सागर जी ने कहा कि आप अपनी आत्मा में झाकें। कुछ क्षण के लिए ही सही यदि आप अपनी आत्मा में डूब गए तो आप धन्य हो जाएंगे। पूरे दिन संसार की माला मत फेरिये। आपने जो यहां प्राप्त किया है उसे आप यही छोड़ जाएंगे,केवल आराधना के बल पर आपने जो आपने प्राप्त किया है,वही आपके साथ जाएगा।
‎ मुनि श्री मौलिकप्रभ जी ने कहा कि कहीं ना कहीं आपमें छोटा सा परिवर्तन भी आया और आप सही तत्व को पकड़ लिए तो आप धन्य हो जाएंगे। थोड़े समय के सुख के लिए आप अपना समय बर्बाद मत कीजिए। जितना ज्यादा हो सके आप अपने लिए समय निकालिए। साधु जितना मौन रहेगा, वह उतना ही अंतर में उतर पाएगा। आप यदि प्रतिदिन अपने लिए समय निकालेंगे तो आप एक दिन अवश्य अपनी आत्मा में उतर जाएंगे। तब आपका जीवन धन्य-धन्य हो जाएगा।
‎ मुनि श्री ने कहा कि आप अपनी आत्मा में इतना उतर जाएं कि संसार की भौतिक वस्तुएं आपको तुच्छ लगने लगे और आपको प्रभावित न कर पाए। आप कोशिश करते रहें एक न एक दिन अवश्य सफल होंगे। तब आप अपनी मस्ती में जिएंगे और दुनिया की कोई भी चीज आपको प्रभावित नहीं कर पाएगी। आप आत्मा को लक्ष्य कर चलेंगे तो मौत भी आपको प्रवाहित नहीं कर पाएगी। संसार की यात्रा हमने बहुत कर ली है अब हमें आत्म यात्रा करनी होगी ताकि हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें।

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