चातुर्मास के पहले रविवार को महासाध्वी मण्डल के मुखारबिंद से जिनवाणी सुनने उमड़े श्रावक-श्राविकाएं
भीलवाड़ा(अमर छत्तीसगढ) ,13 जुलाई। अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में आयोजित वर्षावास-2025 के प्रथम रविवार को जिनवाणी सुनने के लिए श्रावक-श्राविकाएं उमड़ पड़े।
भीलवाड़ा शहर ही नहीं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों व अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रावकगण महासाध्वी मण्डल के मुखारबिंद से जिनवाणी सुनने के लिए सुभाषनगर स्थानक में पहुंचा।

प्रवचन में महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. ने भोजन करते समय अन्न का एक दाना भी जूठा नहीं छोड़ने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हमे अपनी ओर परिवार की पुण्यवानी बढ़ानी है तो भोजन करते समय कभी जूठा नहीं छोड़े। जूठन छोड़ने पर पुण्यवानी घटती है। जो अन्न का आदर करता है उसका यह भव ओर परभव भी सुधर जाता है। उन्होंने कहा कि पुण्य के साथ भावना पवित्र होने पर स्वर्ग का सुख मिलेगा।

पुण्य खत्म होने पर पुण्यवानी भी समाप्त हो जाती है। आगम का श्रवण करने ओर मंत्रोच्चार करने से भी पुण्य बढ़ते है। साध्वीश्री ने कहा कि हम सुख पाना तो चाहते है पर उसे बाहर ढूंढ रहे है जबकि सुख तो हमारी आत्मा व दिल के भीतर है।
धर्मसभा में स्वर साम्राज्ञी महासाध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा. प्रेरणादायी मधुर भजनों से परिपूर्ण जिनवाणी श्रवण कराते हुए कहा कि चातुर्मास में आसमान से पानी ओर संत-साध्वियों के मुखारबिंद से जिनवाणी बरसती है।

पानी शरीर की प्यास को ओर जिनवाणी आत्मा की प्यास को बुझाती है। बुराई को छोड़ अच्छाई को देखो नर में भी नारायण पाया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी सारी दौड़ धूप सुख पाने के लिए है पर यह नहीं पता कि सुख ओर दुःख उत्पन्न करने वाली हमारी आत्मा है। संसार में भौतिक सुविधाओं का अंबार है फिर भी सुख की तलाश है।

इच्छाओं पर नियंत्रण किए बिना सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि संसार में केवल परमात्मा के पदचिन्हों पर चलने वाला निर्लोभी संत ही सुखी है। परमात्मा की वाणी याद रखेंगे तो सुख की प्राप्ति होगी। सुख में भगवान को भूल जाने से दुःख का आगमन होता है।

धर्मसभा में वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने सुख विपाक सूत्र का वाचन करते हुए कहा कि जीवन में अज्ञान का अंधकार मिटा ज्ञान की ज्योति प्रज्वलित करने की राह जिनवाणी दिखाती है। धर्मस्थान पर जाने से अज्ञान का अंधेरा समाप्त होता है। उन्होंने कहा कि सुखविपाक सूत्र का स्वाध्याय कर ले तो जीवन में दुःख आएगा ही नहीं ओर आ भी गया तो पता नहीं चलेगा ।

सुख भौतिक सााधनों में नहीं साधना में है। सुखी जीवन के तीन मंत्र है शुभ भाव, शुभ लाभ एवं शुभ खर्च। शुभ कार्य करने से शुभ लाभ होगा। भला करने वाला कभी नुकसान में नहीं रहता। धर्मसभा में विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

बेंगलोर,अजमेर सहित विभिन्न स्थानों से पधारने वाले अतिथियों का स्वागत चातुर्मास समिति एवं सुभाषनगर श्रीसंघ के बंशीलाल बोहरा,राजेंद्र चंडालिया, अनिल कोठारी,दिनेश डांगी, हनुमान गोखरू आदि पदाधिकारियों ने किया। संचालन चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने किया।
कई श्रावक-श्राविकाओं ने तेला, बेला, उपवास, आयम्बिल, एकासन, तप के प्रत्याख्यान भी लिए। समारोह में महासाध्वी मण्डल के चातुर्मासिक मंगल प्रवेश के अवसर पर सजीव झांकियों की प्रस्तुति देने वाले बच्चों को भी चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सम्मानित किया गया। नियमित चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.45 से 10 बजे तक हो रहे है।

प्रतिदिन दोपहर 2.30 से 4 बजे तक महासाध्वी मण्डल से धर्मचर्चा का समय तय है। चातुर्मास में हर गुरूवार को प्रवचन समय में मंगलकारी अनुष्ठान एवं हर शुक्रवार को पद्मावती एकासन आराधना विधि का आयोजन होगा।
निलेश कांठेड़
मीडिया प्रभारी

