नगरी(अमर छत्तीसगढ) 17 जुलाई ।. जैन आचार्य श्री विजयराज जी म सा की आज्ञानुवर्ती साध्वी श्री वैभव श्री म सा ने आज ओसवाल भवन नगरी में चातुर्मास में चले रहे प्रवचन में बताया कि हम अपना पेशन्स बनाये रखे । घर मे क्रोध के प्रसंग आते है लड़ाई झगड़े होते है , और हमारा घर अशांत होता है तो हम नाना प्रकार के व्रत करते है। घर मे सुख शांति लानी है तो मौन व्रत अपनाइये ।
रेड सिग्नल आने पर हम हमारे पास सभी लाइसेंस होने पर भी अपना वाहन रोक देते है,पर घर मे क्रोध रूपी रेड लाइट जलती है तो हम नही रुकते है हमारा पावर बढ़ते जाता है क्या हमें लाइफ लाइसेंस हमेशा के लिए मिला है? इस क्रोध की अग्नि से हम परिणामस्वरूप नही सोचते कि नरक में जाकर अपनी दुदर्शा कैसे भोगेंगे।
मछली जानती है तैरना ,शेर जानता है दहाड़ना किन्तु आज के इंसान को सिखाना पड़ता है, कैसे जीना । मनुष्यों के तरह जिये न कि जानवरो की तरह।
हमने शांत रहिये का बोर्ड बाहर कई स्थानों पर पाया पर यह बोर्ड तो घर के कमरों में होना चाहिए।
वाद विवाद शाला में हो तो नियम है एक पक्ष बोलेगा तो दूसरा चुप रहेगा।
बोलते जरुर है और कटरता से एक दूसरे की बात काटते है पर झगड़ा नही होता है ठीक यही नियम हम अपने जीवन मे अपना लेवे। पेशेंस रखें गुस्से में विवेक का बल्ब बन्द हो जाता है बुद्धि पर पर्दा पड़ जाता है।
आज के प्रवचन में 21 उपवास श्रीमती कंचन गोलछा व 13 उपवास प्रिंस गोलछा व 9 उपवास 14 भाई बहनों ने लिये। प्रवचन प्रतिदिन चल रहे हैं।

