समझे धर्म का मर्म सुख दुःख में रखे समभाव, जिनवाणी सुनने आत्मकल्याण – संयमप्रभाजी…. धर्म साधना ओर तप त्याग से कमाया पुण्य रूपी धन ही परभव में आएगा काम- शशिप्रभाजी

समझे धर्म का मर्म सुख दुःख में रखे समभाव, जिनवाणी सुनने आत्मकल्याण – संयमप्रभाजी…. धर्म साधना ओर तप त्याग से कमाया पुण्य रूपी धन ही परभव में आएगा काम- शशिप्रभाजी

सूरत गुजरात (अमर छत्तीसगढ) ,17 जुलाई। जीवन में सुख दुःख तो क्षण भंगुर है हमे इसमें नहीं उलझना है। हमे अपने आत्मकल्याण के लक्ष्य से नहीं भटकना है। ज्ञानीजन कहते है कि हम अनादिकाल से जिस सुख को खोज रहे है वह कहीं बाहर नहीं बल्कि हमारे भीतर ही मौजूद है। अर्न्तचक्षु खुल जाएंगे तो उस सुख से साक्षात हो जाएगा। अपनी आत्मा के लिए समय निकाल उसे समझे ओर भेद विज्ञान की साधना करे।

ये विचार श्रमण संघीय आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनिजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी एवं राजस्थान प्रवर्तिनी साध्वी शिरोमणी परम पूज्या सद्गुरूवर्या श्री यशकंवरजी म.सा.,आध्यात्म साधिका समतामूर्ति परम पूज्या सद्गुरूवर्या श्री सिद्धकंवरजी म.सा. की सुशिष्या संयम साधिका श्री संयम प्रभाजी म.सा. ने गुरूवार को श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में आयोजित चातुर्मास ‘‘शुद्धता से सिद्धालय की ओर’ के तहत प्रवचन में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि जिनवाणी सुनने से ही हमारी आत्मा का कल्याण होगा ओर हम धर्म का मर्म समझ वास्तविक सुख की अनुभूति कर पाएंगे।

हमे अनुभवी ओर बड़ो की बात आदर व सम्मान के साथ सुनेंगे तो जीवन में कहीं भी ठोकर नहीं खाएंगे। हम सुख आए या दुःख समभाव में रहेंगे तो दुःख आकर भी हमे परेशान नहीं कर पाएगा।

साध्वीश्री ने कहा कि भगवान महावीर की अंतिम देशना उत्तराध्ययन सूत्र के माध्यम से प्रभु की वाणी सुनकर हम सिद्ध बुद्ध हो सकते है। प्रभु की वाणी सुनकर हमारे मन में संसार के प्रति विरक्ति के भाव जागृत होंगे। तीर्थंकर प्रभु का जन्मोत्सव मनाने मेरू पर्वत पर स्वर्ग से देवी देवता आते है ओर समोवशरण की रचना भी होती है।

उन्होंने भगवान महावीर की स्तुति में प्रेरणादायी भजन की प्रस्तुति भी दी। धर्मसभा में मधुर व्याख्यानी श्री शशिप्रभाजी म.सा. ने कहा कि अनीति व कपट से कमाया गया पैसा कभी फलता नहीं है।

वहीं धन सार्थक ओर लाभदायी होगा जो न्यायपूर्वक व नीति से कमाया गया हो। हम जड़ ओर चेतन का ज्ञान होना चाहिए। जो पराया है उस पर हमारी नजर नहीं होनी चाहिए। अपने धन का सदुपयोग करने पर जीवन में सुख शांति मिलती है।

उन्होंने कहा कि इस संसार में कमाया कागजी धन हमारे काम नहीं आएगा परलोक में तो वहीं पुण्य रूपी धन काम आएगा जो हमने धर्म साधना ओर तप त्याग से अर्जित किया होगा।

साध्वीश्री ने कहा कि हम भोग विलास ओर फैशन के नाम पर पैसे की फिजुलखर्ची करने की बजाय उसका उपयोग सेवा ओर परमार्थ में करना चाहिए। हमे हमारे पाप कर्म या पुण्य कर्म के आधार पर ही फल भोगना होगा। तप की आराधना कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ माध्यम है।

धर्मसभा में स्वाध्यायशीला साध्वी श्री किरणप्रभाजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। पूज्य महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में गुरू वेणी अंबेश दरबार में निरन्तर तप त्याग व धर्म ध्यान की गंगा प्रवाहित हो रही है। एकासन,आयम्बिल,उपवास की लड़ी निरन्तर चल रही है।

धर्मसभा में भीलवाड़ा,चलथान आदि स्थानों से पधारे अतिथियों का स्वागत गोड़ादरा श्रीसंघ द्वारा किया गया। प्रश्नोत्तरी लक्की ड्रॉ के लाभार्थी उमरावसिंहजी, हितेशजी,राजकुमारजी आंचलिया परिवार मोतीपुर(गोड़ादरा) रहे।

प्रभावना के लाभार्थी स्व.हीरालालजी रतनदेवी चौधरी के पुण्य स्मृति दिवस पर सुरेशकुमारजी सकलकुमारजी चौधरी परिवार गोड़ादरा (परासोली वाले) रहे। संचालन नवयुवक मण्डल के पूर्व मंत्री विजय नाहर ने किया।

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श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, गोड़ादरा, लिम्बायत, सरत

(अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन)

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