श्रद्धा भाव से नवकार भक्ति से संसार से सारे संताप दूर हो जाते- मुकेशमुनिजी…. जिनवाणी सुनने से जीवन में होता सुख का आगमन ओर दुःख की विदाई- सचिनमुनिजी

श्रद्धा भाव से नवकार भक्ति से संसार से सारे संताप दूर हो जाते- मुकेशमुनिजी…. जिनवाणी सुनने से जीवन में होता सुख का आगमन ओर दुःख की विदाई- सचिनमुनिजी

पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ) ,20 जुलाई। लाखों भक्तों की श्रद्धा व आस्था के केन्द्र श्रमण संघीय द्वितीय पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य श्री आंनदऋषिजी म.सा. की 126वीं जयंति के उपलक्ष्य में श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,बिबवेवाड़ी पूना के तत्वावधान में रसिकलाल एम.धारीवाल स्थानक भवन में पांच दिवसीय आयोजन रविवार से पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा के सानिध्य में शुरू हो गए।

इन आयोजन के तहत पहले दिन सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक महामंगलकारी सर्व सिद्धीदायी नवकार महामंत्र का जाप किया गया। जाप के माध्यम से सर्व मंगल ओर सुख शांति की कामना की कई।

इस जाप में पूना व आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। जाप के बाद प्रवचन में पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि श्रद्धा भाव से नवकार भक्ति से संसार से सारे संताप दूर हो जाते है ओर असीम आनंद एवं सुख की प्राप्ति होती है।

आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. का गुणगान करते हुए कहा कि आनंद बाबा जैसे महापुरूषों के प्रति पूनावासियों की श्रद्धा व आस्था से पूरा भारतवर्ष परिचित है। ऐसे महापुरूषों का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है।

उन्होंने हमेशा मानव सेवा व जीव दया की प्रेरणा देते हुए जिनशासन की अपार सेवा की। उन्होेंने कहा कि दुनिया में अहिंसा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है, सभी धर्मों का सारांश अहिंसा है। जिस तरह समुद्र में सारी नदिया मिलती है उसी तरह अहिंसा में सारे धर्म मिलते है।

किसी भी महापुरूष, ऋषि, मुनि या चिंतक ने कभी हिंसा की बात नहीं की ओर हमेशा अहिंसा का प्रचार करते हुए इसे सबसे बड़ा धर्म माना है।धर्मसभा में सेवारत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने दुनिया को जीयो ओर जीने दो के संदेश के माध्यम से अहिंसा का महत्व समझाया।

उन्होंने आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. के प्रेरक जीवन प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि सत्य ओर अहिंसा के मार्ग पर चलने वाला जीवन में कभी दुःखी नहीं होता और हिंसा का मार्ग अपनाने वाले का अंत हमेशा दुःखद होता है। इसलिए व्यक्ति को कभी अहिंसा मार्ग का त्याग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहिंसा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का कारण बनती है। प्राणी मात्र पर होने वाली हिंसा को बर्दाश्त नहीं कर उसका विरोध करना चाहिए।

प्रार्थनार्थी श्री सचिनमुनिजी म.सा. ने कहा कि जिनवाणी सुनने से जो सुख प्राप्त होता है वह सबसे अधिक आनंदकारी ओर आत्मीय अनुभूति कराने वाला होता है। जो जिनवाणी श्रवण का अवसर मिलने के बाद भी लाभ नहीं उठा पाते है वह कर्मो की निर्जरा करने के लिए मिले अवसर से चूकते है।

चातुर्मासिक आराधना हो या सामान्य दिन हमे प्रभु की भक्ति व जिनशासन की आराधना हमेशा करनी चाहिए इससे दुःख कम होकर सुख का आगमन जीवन में होता है। धर्मसभा में युवारत्न श्री नानेशमुनिजी म.सा. एवं प्रज्ञारत्न श्री हितेशमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा. आदि ठाणा की प्रेरणा से चातुर्मास में त्याग तपस्याओं का दौर भी जारी है। श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास, एकासन,आयम्बिल, उपवास आदि तप के प्रत्याख्यान भी लिए। प्रभावना एवं अल्पाहार के लाभार्थी पन्नालालजी पितलिया परिवार रहा।

आचार्य श्री आनंदऋषिजी म.सा. की जयंति पर पांच दिवसीय आयोजन के तहत सोमवार को आयंबिल दिवस मनाते हुए लोगस्स जाप एवं मंगलवार को घंटाकर्ण महावीर स्रोत का जाप,23 जुलाई को आनंद चालीसा का जाप एवं अंतिम दिन 24 जुलाई को सामायिक दिवस मनाते हुए 2-2 सामायिक करने के साथ ओम आनंद जाप होगा। चातुर्मास में नियमित प्रवचन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक हो रहे है।

श्रीसंघ सम्पर्क सूत्र-
श्री पोपटलालजी ओस्तवाल, अध्यक्ष
मो. 9823081825
श्री माणिकचंदजी दुग्गड़, उपाध्यक्ष
मो. 9890940941
श्री गणेशलाल ओसवाल,महामंत्री
मो. 9921879613

श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,बिबवेवाड़ी पूना

प्रस्तुतिः अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन,

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