संसार की असारता यदि समझ में आ जाए तो मन में वैराग्य आ जाएगा- वीरभद्र मुनि

संसार की असारता यदि समझ में आ जाए तो मन में वैराग्य आ जाएगा- वीरभद्र मुनि


राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 22 जुलाई। प्रख्यात जैन संत एवं मुनि विनय कुशल जी के सुशिष्य मुनि वीरभद्र (विराग ) जी ने कहा कि संसार की असारता यदि समझ में आ जाए तो मन में वैराग्य आ जाएगा। आपका वस्तुओं के प्रति मोह नहीं रह जाएगा। एक न एक दिन सबको मरना है ही किन्तु मृत्यु शरीर की होती है आत्मा की नहीं। कोई भी आत्मा को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। अंदर समता व समाधि आ जाए तो जीव अपना स्थान बदल देता है।


जैन बगीचे के नए हाल में आज अपने नियमित प्रवचन में मुनि वीरभद्र (विराग ) जी ने कहा कि रुप -रुप में भी फर्क होता है। एक रूप विकार में डालता है तो एक रूप उपकार की ओर ले जाता है। यदि किसी ने भी थोड़ा सा भी एहसान आप पर किया हो तो वह आपको याद रहना चाहिए।

मन में कृतज्ञता का भाव रहना चाहिए। हर व्यक्ति कहीं न कहीं हमारा उपकार करता ही है, इसलिए सबके प्रति कृतज्ञता का भाव रखें। अपने ऊपर किए गए उपकार को जीवन में कभी नहीं भूलना चाहिए। अपने भीतर जब विनय का गुण आएगा तभी हमारे भीतर धर्म प्रवेश कर सकता है।


मुनि श्री ने कहा कि 12 प्रकार के तपों में से एक है विनय। प्रायश्चित के बाद का स्थान विनय को दिया गया है। यहां तक कि स्वाध्याय को भी इसके बाद रखा गया है। इसलिए विनय होना जरूरी है। विनयवान व्यक्ति ही धर्म पथ में आगे बढ़ता है। विनय के लिए संस्कार का होना जरूरी है।

पुण्योदय और पापोदय दोनों साथ-साथ चलते हैं। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहतें हैं,इससे न घबराएं बल्कि इससे संघर्ष करते हुए विनय के मार्ग में आगे बढ़ते रहें और अपने लक्ष्य मोक्ष की ओर बढ़ जाएं। कर्म कब बदल जाता है कहा नहीं जा सकता किंतु हमें मोक्ष प्राप्त करने के लिए कर्म करना होगा। जितना धर्म का काम कर सकते हैं करें, कर्म हमें ऐसा करना है कि हम मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ पाएं।

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