राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 29 जुलाई। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि भूल से भी किसी की निंदा ना करें। जरूरत पड़े तो सामने बोल दे किंतु निंदा ना करें। निंदा करने वाला व्यक्ति निश्चित तौर पर नरक जाता है। मुनि श्री ने कहा कि दूसरे में दोष देखना ही नहीं चाहिए।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग)जी ने आज यहां जैन बगीचा स्थित उपाश्रय भवन में अपने नियमित प्रवचन में उक्त उदगार प्रकट करते हुए कहा कि जिस किसी के लिए भी निंदा निकलती है, निश्चित है कि उसके प्रति हमारे मन में सद्भाव तो नहीं है।
यह महा दुर्गुण है। उन्होंने कहा कि हम किसी की निंदा करते हैं तो निश्चित तौर पर वह दुर्गुण हमारे मन में आएगा ही। हमें गुण देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि माया मिश्रावाद अर्थात मन में कुछ और बाहर कुछ और जैसी स्थिति रहने से पाप होता है।
व्यक्ति अच्छा दिखने की कोशिश करता है लेकिन इससे कल्याण नहीं होने वाला। सदा रहे सरल रहे तो मोक्ष का मार्ग आसानी से मिलेगा।
जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि एक-एक कर अपने भीतर के अवगुणों को त्याग करें तो आत्म कल्याण के मार्ग की ओर निश्चय ही बढ़ेंगे। हमारे भीतर के अवगुण खत्म ही नहीं हो रहे फिर हम अपने गुणों को निखारेंगे कैसे? जब तक अंदर के अवगुण साफ नहीं होंगे तब तक हम आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ नहीं पाएंगे।
मिथ्यावाद सबसे बड़ा पाप है। हमने अन्य ज्ञान प्राप्त करने के लिए जितनी मेहनत की है, इतनी मेहनत आध्यात्म ज्ञान प्राप्त करने के लिए नहीं की। आज भी हम अज्ञानता से बाहर नहीं आए हैं। एक मिसअंडरस्टैंडिंग के कारण हम भटक रहे हैं।
यह स्थिति आत्मज्ञान नहीं होने के कारण उत्पन्न हुई है। धर्म जिस दिन समझ में आ जाएगा हम स्वयं ही मोक्ष द्वार की ओर बढ़ जाएंगे। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

