रायपुर (अमर छत्तीसगढ) 29 जुलाई। शासन दिपिका साध्वी मंजुला श्रीजी वर्षावास में आत्म जागृति पर चल रहे धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा- हे भव्य उपासकों परमात्मा महावीर संसार में डूबते हुए समस्त प्राणियो के लिये द्वीप के समान रक्षक थे। परमात्मा महावीर ने हमें जैन धर्म में जीने की राह बताई है। आप लोगो को गुरूदेव कृपा करके चार्तुमास देते है।
इस चार्तुमास में आप सभी को हम जागने का संदेश निरंतर दे रही है। अभी भी जिस परिवार में जागृति नही आई है वे परिवारजनों को (बेटे, बहु, बच्चों) आदि में परमात्मा की बताई विधि क्रिया को जानकर उन्हे धर्म से जोड़े।
आज के इस कलयुग मे बहुरानी- बच्चों आदि को उपरी संस्कृति से बचाना बहुत जरूरी हो गया है उन्हे साधु-साध्वी के जहां है वहां दर्शन करें वहां ज्ञानार्जन लें तभी उनके जीवन को सही दिशा मिलेगी। उसका जीवन हमेशा-हमेशा के लिये संस्कारवान बन जाएगा।
आज पता ही नही चल पा रहा है पारिवारीक सदस्य मोबाईल में क्या देख रहे है कितनी अश्लील चित्र एवं लड़ाई, झगड़े आदि देखकर परमात्मा की दी यह सुंदर जिन्दगी मिली आत्मा को कहां नरक में ले जा रहे है।
परमात्मा की जिनवाणी यही संदेश दे रही है। हमें यह शुद्ध जैन धर्म पुन्यवाणी से मिला है हर चीज हर क्रिया को परमात्मा के नवतत्वों से जानकर, समझकर कार्य करते रहो। फिर देखो जीवन में निखार ही निखार आ जायेगा।
धन्नाशाली भद्र को राजकुमार रथ लाने ले जाने लगा यह देख फिर तीनो भाई ईर्ष्या करने लगे। पिताजी से शिकायत की धन्ना ने यह पैसे जुआ खिलाकर कमाया है हम लोगो ने नहीं कमाया लेकिन गलत काम भी नहीं किया। पिताजी ने कहा पता नहीं आप लोगो को क्या हो गया धन्ना ने तो सहज काम किया और राजकुमार को भी सुधार दिया।
मुझे अब यही समझ आ रहा है तुम लोग में सब अच्छा है बुराई एक ही चीज की नजर आ रही है अपने भाई धन्ना के गुण न जानकर सिर्फ ईर्ष्या ही ईर्ष्या कर रहे हो।
अच्छा यही होगा तुम लोग सुधर जाओ नही तो परिवार की बदनामी ही करने में लगे रहोगे। धन्ना ने राजकुमार को सुधारा उससे एक गुण तो ले लो। तीनो बेटे से पिताजी का आगे क्या संवाद होता है क्रमशः जारी है। आगे जानेंगे।

