महावीर के शोध-विज्ञान को समझ कर जितना जीव, तप एवं त्याग करते चलेगा तो वह परमात्मा की मंजिल को पा लेगा – साध्वी मंजुला

महावीर के शोध-विज्ञान को समझ कर जितना जीव, तप एवं त्याग करते चलेगा तो वह परमात्मा की मंजिल को पा लेगा – साध्वी मंजुला

रायपुर (अमर छत्तीसगढ़) 6 अगस्त। शासन दिपिका साध्वी मंजुला श्री जी भव्य आत्माओं को निरंतर जगाने का प्रयास कर रही है धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा हे भव्य उपासकों- अरिहंत परमात्मा भगवान महावीर सर्वज्ञ सर्वदर्शी का अंतिम निर्वाण (मृत्यु) का समय निकट आया तो तीनो लोक स्वर्गलोक, नरकलोक और मृत्युलोक में हाहाकार मच गया।

सभी तीनो लोक में शान्ति देने वाले प्रभु हमें छोड़ जा रहे है। यह जानकर तीनो लोक में सभी दुखी हो रहे थे।

स्वर्गलोक से देवो के देव शकेन्द्रदेव प्रभु महावीर के चरणो में पहुँचे विनम्र हाथ जोड़ निवेदन किया- प्रभु यह मृत्यु समय को टाल दें आपकी तीनो लोक में जरूरत है।

परमात्मा महावीर बोले यह संभव नही है जो अपना कर्म लेकर आया है उसे समय पर ही भोग कर जाना पड़ेगा।

हे शकेन्द्र तुम चिन्ता मत करो मै तीनो लोक सुखी करने के लिये चार तीर्थ साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविका का बनाकर जा रहा हूँ जो इन तीन लोक में दया और शांति देने वाले होंगे। इन बातो से प्रसन्न होकर इन्द्र शकेन्द्रदेव हाथ जोड़कर चले गये।

हे भव्य उपासकों हम रोज भगवान महावीर के नवतत्वों का ज्ञानार्जन कर रहे है। छः काया जीवों कषायों को उन्होने जीता वह भी जान समझ रहे है। फिर भी आज के इस कलयुग में परमात्मा महावीर के शोध-विज्ञान को समझ कर जितना जीव, तप एवं त्याग करते चलेगा तो वह परमात्मा की मंजिल को पा लेगा।

हे भव्य उपासकों कीचड़ में पानी डालो तो ये हिंसा पाप के कार्य 6 काया के जीवों का अपने जीवन में पाप बढ़ा रहे है। आज जहां कचरा रहता है रसोईघर एवं घरों में वहां जीव रहते है पहले उसे सफाई कर हटाओ फिर वहां पोछा सफाई आदि करो इसका हम कितना ध्यान रखते है? ऐसा ही ऑफिस आदि में शुद्ध सफाई करना चाहिये यह ध्यान नही रखा तो अनेक जीव मर जाते है।

यही हालत Mobile, A.C., Light आदि का दुरूपयोग बढ़ता जा रहा है परमात्मा महावीर कह रहे है विवेक रखो संयम के साथ हर जीवों की रक्षा व अभयदान दोगे तो वह भी फल तुम्हे प्राप्त होगा। ये प्रमाद से बच जाओगे।

इस छोटी-छोटी भूल में चौदहपूर्व धारी साधू भी प्रमाद कर नरक और निगोद में चले गये। इसीलिए परमात्मा महावीर संदेश दे गये है पृथ्वीकाय आदि का दुरूपयोग मत करो। इसका पूरा स्वरूप परमात्मा महावीर ने नव-तत्वों के ज्ञान से हमें बता गये है। आवश्यकता है जागने की जागकर जीवन सफल बनाने की।

हे भव्य उपासकों-संसार में हम जीवन हीरा, पन्ना, सोना आदि देख रहे है ये सब देवों के देवलोक का यह वह ही पदार्थ है। इस पर आशक्ती मत रखो। ये आयुष पूर्ण होने पर पुनः अपने स्थान को लौट जाती है। ये सारे संसार की संरचना परमात्मा अपने-अपने

कर्मानुसार बना रखी है। पुण्य काम करने वाला पुण्यवान बनेगा। पाप करने वाला जन्म-मरण कर संसार में घुमता रहेगा। आप परमात्मा महावीर के शोध व कार्य से चलते रहोगे तो सिद्ध परमात्मा की मंजिल मिल जायेगी। हम भाग्यशाली है इस पांचवे आरे में भी जिनवाणी प्रभु की सुनने मिल रही है।

हे भव्य उपासकों धन्नाशाली भद्र से तीनो भाई कितना भी बोलते रहे वह शांत रहा उसने प्रमाद नही किया। इधर तीनो भाई की पत्नियों ने धन्ना की खूब तारीफ की। अपने पतिदेवों से कहा आप धन्ना को परेशान मत करो। वह अकेला ही सभी को संभाल लेगा। पिताजी भी धन्ना को स्नेह, प्यार देते है फिर भी तुम लोग इसे परेशान मत करो।

धन्ना ने अपनी भाभीयों की बात सुनी और कहा भाभी आप मेरी प्रशंसा मत करें। ये लोग और जलने लग जायेंगे। आप लोग शांत रहो। पहले ही ये तीनो भाई पिताजी की बात नही सुनते है। उन पर क्रोध करते है? इसलिये आप मेरी तारीफ न करे। ये सोचेंगे आप लोग भी धन्ना का साथ दे रहे है।

ऐसा बोलकर तीनो भाभी से प्रतिज्ञा ले ली अब धन्ना की तारीफ नही करोगे। हम दिल से तुम्हें आर्शीवाद देती रहेंगी। ऐसा तीनो ने धन्ना से कह दिया।

धन्ना तीनो बार विजेता बना फिर भी तीनो भाई पिताजी से बोले धन्ना की पूरे गांव में चर्चा हो रही है। आप जागें आगे कदम बढ़ाए अब आगे देखेंगे धन्ना की प्रशंसा होती है या प्रशंसा घटती है, क्रमशः..

गोल्डी सुराना ने बताया आज धर्मश्राविका सुश्री मुस्कान लूनावत (पिता कन्हैया लूनावत) ने 30 उपवास की तपस्या पूर्ण कर साध्वी मंजुला श्री जी से पच्चखान लिये।

इस अवसर पर मंजुला श्री जी ने सभा में 30 तेले करने वालो का लक्ष्य रखा सभा में उपस्थित 20 लोगो ने तेले की तुरन्त स्वीकृति दे दी। आगे प्रयास जारी है।

Uncategorized