रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 6 अगस्त। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने ED के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगाई है। यह याचिका शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 44, 50 और 63 को चुनौती देती है। बघेल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा।
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ कर रही है, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भूइयां और जस्टिस एनके सिंह शामिल हैं।
जज बोले- प्राथमिक आपत्तियों पर होगी बहस
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सबसे पहले प्राथमिक आपत्तियों पर बहस होगी, फिर उसका जवाब सुना जाएगा और उसके बाद ही मामले के गुण-दोष पर चर्चा होगी।
कपिल सिब्बल ने उठाई आपत्ति
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अपील की कि यदि सुनवाई सोमवार तक टलती है, तो तय समयसीमा में फैसला आना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी कहा कि धारा 44A से जुड़ा मुद्दा भी बेहद अहम है और उस पर भी सुनवाई जरूरी है।
जज बोले- सुबह 11 बजे PMLA की समीक्षा याचिका होगी सुनवाई
इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सोमवार को अदालत पहले कुछ बेल मामलों की सुनवाई करेगी और फिर सुबह 11 बजे PMLA की समीक्षा याचिका पर सुनवाई शुरू की जाएगी।
भूपेश बघेल ने ED की कार्यशैली पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ED की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईडी लगातार पुराने मामलों को दोबारा खोलकर पूछताछ कर रही है, जबकि अगर कार्रवाई करनी थी तो वह पहले की जाती।
बघेल ने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोग, जिनके खिलाफ पहले से नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी हैं, वे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन उन्हीं के बयानों के आधार पर उनके बेटे की गिरफ्तारी हो गई। उन्होंने सवाल उठाया, “यह किस तरह की प्रक्रिया है?
उन्होंने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने तीन धाराओं को चुनौती दी है, जिनमें विशेष रूप से PMLA की धारा 44 को लेकर आपत्ति जताई गई है। उनका तर्क है कि यदि किसी मामले में एक बार चार्जशीट दाखिल हो चुकी हो, तो उसकी दोबारा जांच केवल कोर्ट की अनुमति से ही की जा सकती है, लेकिन ईडी ने किसी भी केस में अब तक ऐसी अनुमति नहीं ली।
भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि PMLA की धारा 50 के तहत जिस व्यक्ति पर आरोप है, उसी से गवाही लेने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जो न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कोई व्यक्ति खुद के खिलाफ कैसे गवाही देगा?
उन्होंने यह भी बताया कि 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर करीब आधे घंटे तक बहस हुई। इस दौरान उन्होंने एक अन्य मामले का हवाला दिया, जिसमें चैतन्य को पुराने मामले में दोबारा पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था।
अंत में बघेल ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जाने की स्वतंत्रता प्रदान की है।

