रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 9 अगस्त। दादाबाड़ी में चल रहे आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत शनिवार को प्रवचन श्रृंखला में परम पूज्य साध्वी हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने धर्मरत्न प्रकरण ग्रंथ का पठन करते हुए रक्षाबंधन से जुड़े दो प्रेरक प्रसंग सुनाए।
उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और त्याग का भी संदेश देता है।
पहले प्रसंग में उन्होंने बताया कि एक राजा की पुत्री हर वर्ष अपने भाई को राखी बांधती थी। विवाह के बाद वह सिंघ देश चली गई। एक दिन स्नान करते समय हमीर राजा की उस पर दृष्टि पड़ी और उसने उसे पाने की इच्छा की। संकट की इस घड़ी में बहन को अपने भाई की याद आई, जिसने छह माह से उसकी कोई खबर नहीं ली थी।
उसने पत्र लिखकर परिस्थिति बताई और छह माह का समय मांगा। संदेश मिलते ही भाई अश्व पर सवार होकर एक ही दिन में वहां पहुंचा, हमीर राजा को परास्त किया और बहन की रक्षा कर रक्षासूत्र का वचन निभाया।
दूसरे प्रसंग में एक ऐसी छोटी बहन की कथा आई जिसका कोई भाई नहीं था, लेकिन उसे प्रकृति से गहरा प्रेम था। रक्षाबंधन के दिन उसने एक पेड़ को राखी बांधी और परिवार के साथ संकल्प लिया कि उसकी हर हाल में रक्षा करेंगे।
वर्षों बाद जब पेड़ों की कटाई शुरू हुई, तो पूरा परिवार उस पेड़ को बचाने के लिए डट गया। समय बीता, फिर एक भीषण सैलाब आया जिसने बहुत कुछ नष्ट कर दिया, पर वही पेड़ मजबूती से खड़ा रहा और परिवार को आश्रय मिला।
साध्वी जी ने कहा—चाहे वह भाई-बहन का बंधन हो या प्रकृति के साथ प्रेम का नाता, सच्चे मन से की गई रक्षा का फल जीवनभर मिलता है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली तथा आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने जानकारी दी कि दादाबाड़ी में प्रतिदिन सुबह 8:45 से 9:45 बजे तक साध्वीजी के प्रवचन का आयोजन भी हो रहा है। समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर जिनवाणी का लाभ लें।

