पुष्कर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 22 अक्टूबर
(प्रकाश जैन, वरिष्ठ पत्रकार)
पटाखे छोड़ना हिंसा है इसका त्याग आवश्यक…
श्री मरुधर केसरी रूप सुकन चातुर्मास समिति एवं श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पुष्कर के तत्वावधान में आयोजित श्री मरुधर केसरी पारमार्थिक संस्थान परिसर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए श्रमण संघ के प्रमुख संत प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने कहा कि भारत भूमि प्रारंभिक काल एवं आर्य संस्कृति से ही तीर्थंकरों की भूमि रही है।
जैन धर्म के 24 तीर्थंकर इसी भूमि पर हुए हैं। पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव, तो अंतिम एवं चौबीसवें तीर्थंकर हुए भगवान महावीर। भगवान महावीर का जन्म नाम वर्धमान था परंतु महावीर बनने के लिए सत्ताईस भवो को पार किया। आज यदि किसी कार्य को करने में सत्ताईस माह लग जाए तो हमारा धैर्य का बांध टूट जाता है।
भगवान महावीर के उपदेशों को साधु-संतों के माध्यम से सुना तो जा रहा है परंतु चिंतन के माध्यम से इस को पचाया नहीं जा रहा है। सर्वप्रथम अहिंसा का उपदेश प्रदान किया गया। उस समय जो हिंसा हो रही थी उससे भी अधिक हिंसा आज देखने को मिल रही है। पटाखे छोड़ना भी हिंसा है इसे मोक्ष कल्याणक दीपावली के पावन अवसर पर त्यागना चाहिये। युवाओं और बच्चों को मानव होने का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिये। इसमें राज्य सरकारों को भी आगे आना चाहिये।
भगवान महावीर की वाणी प्राणी मात्र के लिए है – अमृत मुनि
उपप्रवर्तक संत अमृत मुनि महाराज ने धर्म सभा में कहा कि भगवान महावीर ने लोकतांत्रिक व्यवस्था देते हुए सर्वप्रथम चतुर्विद जैन श्रमण संघ की स्थापना की जिसमें साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका चार तीर्थ के रूप में हैं। जिसको सुचारू रूप से चलाने के लिए इंद्रभूति गौतम आदि ग्यारह गणधरों एवं साध्वी शिरोमणि के रूप में चंदनबाला को दायित्व सौंपा गया। उसी तरह वर्तमान में भी श्रमण संघ गतिमान है।
पूर्व के तेईस तीर्थंकरों ने अंतिम समय में देशना प्रदान नहीं की परंतु भगवान महावीर ने अंतिम समय में 16 प्रहर तक लगातार देशना प्रदान की। यह हम सब पर अनंत उपकार है जो कि उत्तराध्ययन सूत्र के रूप में हमारे सामने उपलब्ध है।
जिसके अंदर विभिन्न प्रकार के उपदेशों के साथ छत्तीस अध्ययन हैं। जिसका स्वाध्याय करना सबके लिए हितकर है। पहला अध्ययन ही विणयसुत्तं नाम से हैं। यदि जिसके अन्दर विनय है तो वह मोक्षमार्ग में अपने कदम बढ़ा सकता है। भगवान महावीर मोक्ष कल्याणक पर चिंतन करें और अहिंसा परमोधर्म एवं विनय को जीवन में अपनाएं।
अपने भीतर का दीपक जलाएं
धर्म सभा में मधुर गायक संत महेश मुनि, संत अखिलेश मुनि एवं डॉ वरुण मुनि ने कहा कि दीपावली के दिन अपने भीतर ज्ञान का दीपक जलाएं। जिस ज्ञान से हम अपने आपको संवार सकें और आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकें।
डॉक्टर वरुण मुनि श्री ने उत्तराध्ययन सूत्र के 36 ही अध्याय का वर्णन करते हुए शिखर अध्ययन 36 वें में बताया कि जीव और अजीव विज्ञान को जानकर ही साधक हिंसा से मुक्त हो सकता है। उत्तराध्ययन सूत्र के इस अध्याय में भगवान महावीर ने परमाणु सिद्धांत के साथ समस्त जीव अजीव के भेद प्रभेदों का वर्णन किया है।
महामांगलिक लेने उमड़े श्रद्धालु श्रावक श्राविकाएं
धर्म सभा में मुनिश्री सुकनमल महाराज एवं अन्य संतों के त्रिदिवसीय आध्यात्मिक साधना संपन्न होने के पश्चात प्रातः कालीन वेला में गौतम महारास के वांछन के साथ भव्य महा मांगलिक का आयोजन हुआ, जिसे सुन कर अनेक श्रद्धालु गदगद हुए।
इस अवसर पर अनेक श्रावक श्राविकाओं ने तेला तप की आराधना संपन्न की। एवं आध्यात्मिक दीपावली मनाते हुए सर्व जीव के लिए मंगल प्रार्थना की गई। पुष्कर सहित प्रदेश एवं देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं का गुरु दर्शन एवम आशीर्वचन हेतु काफी तादाद में श्रद्धालु उमड़े।

