रायपुर की सड़कों में दिखेंगे आवारा पशु : दुर्घटनाओं को देखते हुए कलेक्टर ने बनाई निगरानी टीम, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के दिए निर्देश

रायपुर की सड़कों में दिखेंगे आवारा पशु : दुर्घटनाओं को देखते हुए कलेक्टर ने बनाई निगरानी टीम, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के दिए निर्देश

रायपुर(अमर छत्तीसगढ)। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला प्रशासन ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया है। जिससे आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

इस संबंध में रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने नगर निगम, पुलिस समेत अन्य विभागों को निर्देश जारी कर दिया है। इस नियम का उद्देश्य हादसों को कम करना, पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित और नागरिकों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना है।

मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम, पुलिस, पंचायत और ग्रामीण विकास, पशुपालन, कृषि, लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई और राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से इस पर काम करेगी। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा- नेशनल हाईवे और मुख्यमार्गों की निगरानी की जाएगी। ये ऐसे इलाके हैं जहां आवारा पशुओं के कारण अधिक दुर्घटनाओं का खतरा है।

कलेक्टर ने एनएचएआई और अन्य संबंधित विभागों को सड़कों पर पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए फेंसिंग, गेट और सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

एसओपी के तहत हर ग्राम पंचायत और नगर निकाय स्तर पर निगरानी दल बनाए जाएंगे जो आवारा पशुओं को पकड़कर गौठान या अन्य आश्रय स्थलों तक पहुँचाने का काम करेंगे।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि, यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का अभियान है जो एक महीने तक दिन-रात विशेष अभियान चलेगा।इस संबंध में संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिया गया है।

जिसके अनुसार, सभी विभाग प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय में बताएँगे। इस तरह के अभियान से सड़कों की सुरक्षा बढ़ेगी और दुर्घटनाएं घटेंगी। साथ ही आवारा पशुओं को सुरक्षित ठिकाना मिलेगा।

इस नियम को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति इसकी समीक्षा भी करेगी। वहीं मामले में निगरानी दलों को तीन दिनों में काम शुरू करने का आदेश दिया गया है।

इसके शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर जारी कर दिया है। नेशनल हाईवे के लिए- 1033 और शहरी क्षेत्र के लिए 1100 पर कॉल कर सकते हैं।

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