बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ) 26 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सार्वजनिक आवागमन के रास्ते को लेकर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमणकारी राज्य को सीधी चुनौती दे रहे हैं। कोर्ट ने बिलासपुर कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत कर बताने के निर्देश दिए कि उन व्यक्तियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने क्या कार्रवाई की, जिन्होंने दीवार खड़ी करके फुटपाथ को अवरुद्ध किया। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2025 को होगी।
आपको बता दें कि दयालबंद पुल के नीचे रहने वाले 15 परिवारों के लिए इस्तेमाल होने वाले चिह्नित फुटपाथ को कुछ लोगों ने अवरुद्ध कर दिया है। इन लोगों ने पहले उक्त स्थल से लगी जमीन को खरीदने की कोशिश की थी, जिसमें विफल होने पर उन्होंने अब वहां एक लोहे का गेट और दीवार खड़ी कर दी है, जिस पर एक धमकी भरा नोट भी चिपका है कि उस रास्ते से गुजरने वालों को ‘उचित उपचार’ दिया जाएगा।
इस मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की खंडपीठ ने आरोपियों के रवैए और धमकी देने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने टिप्पणी की कि दीवार पर लिखा संदेश वस्तुतः राज्य के अधिकार के लिए एक सीधी चुनौती है। क्योंकि, किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं है।

