राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 11 दिसम्बर।
तमिलनाडु के मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भाजपा नेता अशोक चौधरी ने कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जज के फैसले से असहमति जताने के बजाय उन्हें निशाना बनाया है।
यह विवाद उस आदेश को लेकर उठा जिसमें जज ने सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर में स्थित दीपस्तंभ पर दीप जलाने की परंपरा को बहाल करने का निर्देश दिया था।
श्री चौधरी ने आगे कहा कि विपक्षी दलों कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग नोटिस पर हस्ताक्षर कर उसे लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को सौंपा है। मंदिर के दीपस्तंभ पर दीया जलाने की परंपरा पिछले कुछ वर्षों से बंद थी।
धार्मिक अनुयायियों द्वारा न्यायालय में याचिका दायर करने के बाद जस्टिस स्वामीनाथन ने आदेश दिया कि मंदिर की यह प्राचीन परंपरा फिर से शुरू की जाए। आदेश में यह भी कहा गया कि दीप जलाने से किसी अन्य समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता।
उन्होंने ने आरोप लगाया कि संबंधित राजनीतिक दलों ने न्यायिक आदेश का विरोध करने के बजाय जज के खिलाफ महाभियोग लाकर न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि अगर निर्णय से असहमति थी, तो उचित रास्ता सुप्रीम कोर्ट में अपील का था, न कि जज को हटाने की प्रक्रिया शुरू करना। यह कदम न्यायाधीशों को भयभीत करने का प्रयास है और इसका लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने हिंदू समुदाय से अपील की कि वे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए सामने आएं।

