बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ) 28 दिसम्बर। आचार्य भगवंत परम्पूज्य श्री महासेनसूरीजी महाराज साहब और साध्वीजी के बिलासपुर आगमन होने जा रहा है। सकल जैन समाज के द्वारा गुरु भगवंतो के विहार में बड़ी संख्या में सदस्य शामिल हो रहे हैं।

29 दिसंबर सोमवार को त्रिवेणी डेंटल कॉलेज से सुबह 5:00 बजे विहार कर महाराणा प्रताप चौक पहुंचेंगे । जहां सकल जैन समाज के सदस्यो के द्वारा भव्य अगवानी की जाएगी । उसके पश्चात् नेहरू नगर स्थित समाज के संरक्षक विमल चोपड़ा के निवास स्थान में पहुंचकर पगलिया करेंगे। फिर वहां से विहार कर सामुदायिक भवन नर्मदा नगर में पहुंचेंगे जहां 7:45 को प्रवचन होगा ।

श्री जैन श्वेतांबर श्री संघ के के पदाधिकारी एवं सदस्यों के साथ बिलासपुर सकल जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रावक श्राविका आचार्य गुरु भगवंतो के विहार, आहार, अगवानी में शामिल हो रहे हैं । जैसा कि आचार्य भगवंत परम्पूज्य श्री महासेनसूरीजी महाराज साहब आदि ठाणा 4 और साध्वीजी आदि ठाणा 19 नागपुर में चातुर्मास संपन्न करने के पश्चात् रविवार सुबह बिलासपुर में स्थित त्रिवेणी डेंटल कॉलेज आगमन हुवा ।
आचार्य भगवंत पैदल विहार कर बिलासपुर से वाराणसी बनारस जाएंगे ।आचार्य भगवंत एवं साध्वी जी प्रतिदिन 15 से 18 किलोमीटर का विहार कर रहे हैं जो सुबह 5:00 बजे से प्रारंभ होता है । समाज के सदस्यो द्वारा भगवंतों की गोचरी– पानी की व्यवस्था का लाभ ले रहे।

धन कितना भी मिले लेकिन धर्म नहीं मिला तो किसी काम का नहीं – आचार्य श्री महासेनसुरी
त्रिवेणी डेंटल कॉलेज में प्रवचन में आचार्य श्री महासेनसुरी जी ने कहा कि सुख शांति धर्म के बिना नहीं, धर्म करते जो सुख शांति मिलती जाएगी। मानव को जन्म मिला, महावीर का धर्म मिला। सभी को सुख देना, इंसान अपने सुख के लिए बहुत मेहनत करता है दूसरों के लिए नहीं । सुख के लिए स्वर्ग है दुख के लिए नर्क ।
भगवान ने मां बाप की भक्ति करने का बताएं उसे करना चाहिए, माता-पिता को वृद्ध आश्रम में मत रखो उनकी सेवा करो उनके उपकार हमारे जीवन में सबसे ज्यादा है और सबसे ऊपर है धन कितना भी मिले लेकिन धर्म नहीं मिला तो किसी काम का नहीं । मानस को जीने की कला नहीं है कैसा पूछना, कैसा खाना, कैसा रहना, कैसा ज्ञान या कुछ नहीं है । इसको हमको सीखना चाहिए ।

जितना समय सामायिक स्वाध्याय में गया है वह जीवन सही- मुनि श्री सिद्ध सेन
मुनि श्री सिद्ध सेन विजय राज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जन्मों की वेदना मरण की वेदना शास्त्रों में बताई गई है । हम अपने जीवन पर विचार कर आने वाला भव का विचार हमको करना चाहिए । हमको समय, शक्ति, संपत्ति मिली है लेकिन इसका उपयोग हम कहां कर रहे हैं, कैसे कर रहे हैं इसके बारे में सोचना चाहिए समय का रिवर्स और ब्रेक नहीं होता है आपका समय चला गया वह वापस नहीं आएगा ।
हम कहां से आये, कहां जाने वाले यह हमको नहीं मालूम हम जैसा करनी करेंगे वैसा वही भरनी होगा। जितना समय सामायिक स्वाध्याय में गया है वह जीवन सही है बाकी जीवन में हम कई तरह के पाप करते हैं ।

इस अवसर का लाभ समाज के वरिष्ठ विमल चोपड़ा, नरेंद्र मेहता, सुभाष श्रीश्रीमाल, भगवान दास सुतारिया, सुरेंद्र मालू, संजय छाजेड़, संजीव चोपड़ा, तुषार मेहता, कुणाल भयानी, विनोद लुनिया, जंदानी जी, गोपाल वेलाणी, शुभचंद बाफना, अलका बाफना, मनीष शाह, किशोर देसाई, गौरव डाकलिया, निकिता गोलछा, चंदन चोपड़ा, संगीता चोपड़ा, ललिका मालू, किरण चोपड़ा, सारंग चोपड़ा, अमरेश जैन एवं अन्य सकल जैन समाज के बड़ी संख्या मे सदस्यागण ले रहे हैं।

गुरु भगवंतों के आहार एवं विहार की व्यवस्था के लाभार्थी परिवार
29/12/25 (सोमवार)
स्थान: सामुदायिक भवन नर्मदा नगर बिलासपुर
लाभार्थी: श्री जैन श्वेतांबर श्री संघ बिलासपुर
30/12/25 (मंगलवार)
- सुबह: सुभाष जैन, संजीव चोपड़ा, रुपेश गोलछा
स्थान: सेंदरी
31/12/25 (बुधवार) - सुबह: अभिनव डाकलिया, गौरव डाकलिया, प्रवीण कोचर
रतनपुर , सिद्धि विनायक मंदिर

