ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 30 दिसम्बर।
(प्रकाश जैन)
मरुधरा की पावन धरा सोजत सिटी स्थित ‘पावन धाम’ आज गुरुभक्ति और मानव सेवा के अनूठे संगम का साक्षी बना।
मौका था, श्रमण संघीय भीष्म पितामह मरुधर केसरी श्री मिश्रीमल जी म.सा. के 42वें पुण्य स्मरण नमन समारोह एवं वरिष्ठ प्रवर्तक श्री सुकनमल जी म.सा. के 80 वें जन्मोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रमों का।सोमवार सवेरे शुभ मंगल मुहूर्त में पंच संतों का भव्य मंगल प्रवेश हुआ, वहीं विशाल रक्तदान शिविर में युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
संतों का भव्य मंगल प्रवेश
सोमवार की मधुर बेला में मरुधरा भूषण,शासन गौरव वरिष्ठ प्रवर्तक श्री सुकनमल जी म.सा. के नेतृत्व में तपस्वी रत्न,उपप्रवर्तक ज्योतिष सम्राट श्री अमृतमुनि जी म.सा., युवा प्रणेता श्री महेशमुनि जी म.सा., बालयोगी श्री अखिलेश मुनि जी म.सा. एवं डॉ. श्री वरुण मुनि जी म.सा. (ठाणा-5) का पावन धाम के दिव्य परिसर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
“चलो बुलावा आया है, गुरु मिश्री ने बुलाया है” के गगनभेदी जयकारों के साथ श्रद्धालुओं ने पलक-पांवड़े बिछाकर संतों का वंदन नमन कर स्वागत किया।
गुरुदेव के दर्शन पाने के लिए सड़क के दोनों ओर भक्तों की कतारें लग गईं। इस अवसर पर उपप्रवर्तिनी राजमती जी महाराज, साध्वी कमल प्रभा, साध्वी प्रतीक प्रभा महाराज का भी सान्निध्य रहा।
रक्तदान महादान – सेवा का अनुपम उदाहरण
गुरुदेव के ‘मानव सेवा ही धर्म सेवा’ के संदेश को चरितार्थ करते हुए एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर मन्नालाल नाबरिया, पारसमल धोका, सज्जनराज सिंघवी परिवार के सौजन्य से आयोजित हुआ।
शिविर में सैकड़ों युवाओं और गुरुभक्तों ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। आयोजकों ने बताया कि गुरु स्मरण समारोह से पहले रक्तदान की यह भावना समाज को नई दिशा और दशा देगी।

रक्तदान करने वाले रक्तवीर राहुल गांधी,करण मुणोत,सुनील चपलोत, श्रेयांश जैन,अक्षय कोठारी, राजू त्रिपाठी,अमन त्रिपाठी,विनीत अग्रवाल,मोहित गुप्ता,विमल समदड़िया,अनिल गुरा,पृथ्वी सिंह, दीनदयाल का आभार श्री मरुधर केसरी जैन गुरु सेवा समिति ट्रस्ट की ओर से किया गया। इस अवसर पर अखिलेश मुनि महाराज ने स्वयं रक्तदान करते हुए रक्तदान करने हेतु प्रेरित किया।

प्रमुख समारोह 01 और 02 जनवरी को,देश भर से हजारों श्रद्धालु गुरु भक्त बनेंगे साक्षी
ट्रस्ट अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश तालेड़ा और सचिव राजेश कुमार तालेड़ा ने बताया कि 01जनवरी को नववर्ष के महामांगलिक एवं 02 जनवरी को प्रमुख समारोह में हजारों गुरुभक्त जुटेंगे। आज के मंगल प्रवेश व सेवा कार्यों ने पूरे वातावरण को अध्यात्म धर्म से नया आयाम प्रदान किया।

जिनवाणी की पावन बरखा में गहरे गोते लगाए गुरु भक्तों ने
धर्मसभा में पांचों संतों ने अपने प्रवचनों में गुरुदेव मरुधर केसरी श्री मिश्रीमल जी म.सा. के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ प्रवर्तक श्री सुकनमल जी म.सा. ने कहा कि “मरुधर केसरी केवल एक नाम नहीं, बल्कि तप और त्याग का वह सूर्य थे, जिनके उदय से अज्ञान का अंधकार मिट गया।
आज हम जिस वटवृक्ष की छांव में बैठे हैं, वह गुरु मिश्री की ही देन है।” वहीं तपस्वी रत्न श्री अमृतमुनि जी म.सा. ने कहा कि “गुरुदेव मिश्री ‘आशु कवि’ और साहित्य के सागर थे।
उन्होंने राजस्थानी भाषा में रामायण और महाभारत रचकर धर्म को जन-जन की भाषा में पिरोया। उनकी कलम और वाणी में साक्षात सरस्वती का वास था। गुरुदेव का जीवन एक खुली किताब है। उनका स्मरण मात्र ही हमारे पापों का नाश करने के लिए पर्याप्त है।
पावन धाम की यह रज (माटी) गुरुदेव के तप से चंदन बन गई है, इसे माथे पर लगाना हमारा सौभाग्य है।” साथ ही युवा प्रणेता श्री महेशमुनि जी म.सा., बालयोगी श्री अखिलेश मुनि जी म.सा. एवं डॉ. श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने कहा कि गुरुदेव ने हमें सिखाया कि धर्म केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि प्राणियों की सेवा में बसता है।

गौशालाओं और विद्यालयों का निर्माण उनकी दूरदर्शी सोच और करुणा का जीवंत प्रमाण है।वे श्रमण संघ के भीष्म पितामह थे। संगठन और समन्वय की जो अद्भुत शक्ति मरुधर केसरी में थी, वह आज के युग में विरले ही देखने को मिलती है। उनका जीवन ‘जियो और जीने दो’ का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
कार्यक्रम में इन्होंने की शिरकत
इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश तालेड़ा, सचिव राजेश कुमार तालेड़ा, कोषाध्यक्ष अनिल संचेती, उपाध्यक्ष नरेश बोहरा, केवलचन्द धोका, सहसचिव एम. विकास धोका, दिनेश भलगट, संगठन सचिव मंगलचंद मुणोत, प्रचार-प्रसार सचिव प्रवीण बोहरा, ललित कुमार पगारिया, सुरेश बलाई, पदमचंद धोका, राजेश कोरीमुथा, शांतिलाल सुराणा, विनोद लोढ़ा, जयंती भंडारी, रविन्द्र गुप्ता, प्रवीण धोका, गौतम गांधी, विशाल कांकरिया सहित सैकड़ों गुरुभक्त उपस्थित थे।
प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार
आशीष जैन ,अनिल कवाड़
जयपुर,ब्यावर, पाली

