ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 7 जनवरी।
(प्रकाश जैन)
श्री दिगंबर जैन पंचायत नशा में दिगंबर परंपरा के ख्याति प्राप्त जैन संत आदित्य सागर मुनि ने युवा पीढ़ी को मानसिक शांति व संतुलित जीवन जीने का संदेश एवं अनेक मंत्र दिए। संत आदित्य मुनि अपने सहयोगी संतों के साथ ब्यावर में मंगल प्रवेश किया।
दिगंबर जैन संघ के संत प्रवर आदित्य सागर महाराज ने जय जयकारो एवम श्रद्धालु भक्तों की भक्ति, श्रद्धा,आस्था एवम एवं समर्पण भाव की उच्च पराकाष्ठा के बीच ब्यावर दिगंबर जैन समाज की विनती को मान देते हुए नगर में पदार्पण किया। श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं के भावपूर्ण स्वागत भक्ति,श्रद्धा अभिनंदन से धर्म नगरी को धर्ममय वातावरण से ओत प्रोत कर दिया।

दिगंबर समाज के संघ प्रमुखों द्वारा ससंघ बैंड बाजा, ढोल नगाड़ों एवं महिला मंडल,युवा मंडल एवं श्रावक मंडल की साक्षी में मंगल प्रवेश उत्सव का आयोजन हुआ। मंगल प्रवेश यात्रा के बाद जैन धर्म के 23 वे तीर्थंकर पुरुषादानी श्री पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर में प्रभु दर्शन कर भगत चौराहे से आरंभ होकर यह मंगल प्रवेश यात्रा सरावगी मौहल्ला,एकता सर्कल, अजमेरी गेट होते हुए दिगंबर जैन पंचायत नसिया पहुंची।
जहां ये मंगल प्रवेश यात्रा धर्म सभा में परिवर्तित हो गई।भगत चौराहे पर मुनि संघ के चरणों में 51 थालों में पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सैकड़ो श्रद्धालु भक्तों को सहज मिला। इस मौके पर संत आदित्य सागर महाराज साहब एवं संत मंडल ने श्रद्धालुओं को मंगल दिव्य आशीर्वाद प्रदान किया।

पंचायती नसिया में आयोजित धर्मशाला में दीप प्रवचलन दिगंबर जैन पंचायत दिगंबर जैन मारवाड़ी समाज एवं पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर अजमेर रोड समिति के पदाधिकारी के अध्ययन पदाधिकारी द्वारा किया गया बात प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य ताराचंद संजय कुमार जितेंद्र कमलेश डोलिया एम नीमच वाला परिवार को प्राप्त हुआ कार्यक्रम का संचालन कमल राव का ने किया।
जहां सुकून है वहीं वास्तविक सफलता है
संत आदित्य सागर महाराज जी ने युवाओं को जीवन जीने की सही कला के अनेक टिप्स एवम मंत्र दिए। उन्होंने इस सूत्र को ॐ इग्नोर नमः की संज्ञा दी। संत प्रवर ने कहा कि मौजूदा वक्त में इंसान भौतिकता एवम विलासिता की चकाचौंध में शांति एवं सुकून से सतत दूर होता जा रहा है संत ने कहा कि सच्ची सफलता सच्ची शांति सुख धन व पद में नहीं है बल्कि आंतरिक शांति अंतर में ही निहित है।

आवश्यकता है उसे खोजने की या सुकून है वही वास्तविक सफलता है मानव जीवन को सार्थक करने के लिए व्यक्ति को धर्म के मर्म को समझने की आवश्यकता है।
युवाओं को दी सीख
दिगंबर जैन धर्म के ओजस्वी वक्ता संत आदित्य सागर महाराज ने कहा कि यूवा पीढ़ी अपने जीवन की प्राथमिकताएं स्पष्ट करें। अपना प्रमुख लक्ष्य करियर व्यवसाय में स्थिरता प्राप्त करना होना चाहिए।धर्म के विषय में उन्होंने स्पष्ट कहा उसमें भी व्यवसाय जितनी ही दृढ़ता होन नितांत आवश्यक है।जिससे समाज में वैमनस्य एवम कटुता उत्पन्न नहीं हों।

ज्ञान ही आत्मा का मूल प्रकाश
धर्म सभा में अपने मर्म स्पर्शी उद्बोधन में कहा कि ज्ञानी आत्मा का वास्तविक प्रकाश है ज्ञानविहीनधर्म आडंबर बन जाता है।जबकि ज्ञान युक्त धर्म साधना मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।उन्होंने कहा कि धन,वैभव, पद क्षणभंगुर है। जबकि ज्ञान शाश्वत है।जीवन के अंधकार को केवल ज्ञान रूपी दीपक ही दूर कर सकता है। समय ज्ञान से व्यक्ति सही एवं गलत का विवेक कर पाता है उन्होंने कहा कि ध्यान से विनय पीने से पात्रता और पात्रता से मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को केवल पूजा पाठ तक सीमित न रह कर शास्त्रों का अध्ययन एवं ज्ञानार्जन करना चाहिए। उन्होंने नित्य प्रति स्वाध्याय पर भी बल दिया।ज्ञान युक्त जीवन अहंकार का क्षय कर आत्म कल्याण की दिशा में गतिशील करता है।

संत मंडल ने नसिया में वर्षों पुराने शास्त्रों को देखा, हुए अभिभूत
संत आदित्य सागर अपने सहयोगी संतो के साथ श्रद्धालु भक्तों के अजमेरी गेट के समीप पुरानी नसिया सेठ चंपा लाल रामस्वरूप जी की
नसिया जी पहुंचे।वहां विराजित भगवान के दर्शन किए एवम मंदिर परिसर के एक क्षेत्र में वर्षों पुराने पड़े शास्त्रों एवम अभिलेखों को बारीकी से देखा एवम संघ प्रमुखों से जानकारी प्राप्त की। संत मंडल इन दुर्लभ शास्त्रों को देखकर खूब अभिभूत दिखाई दिए।इस मौके पर संघ के वरिष्ठ श्रावक प्रकाश गादिया,नाकोड़ा तीर्थ से जुड़े अशोक कोठारी प्रकाश जैन,समाज सेवी अजय डोसी एवम सेवा समर्पित डॉ हर्षवर्धन भगत जी भी थे।
अल्प प्रवास के बाद मुनि मंडल का बिजयनगर की और विहार
संघ के प्रकाश गादिया ने बताया कि संत प्रवर आदित्य सागर मुनि सा ने नगर में अल्प प्रवास पूर्ण कर अपने सहयोगी संत अप्रमित सागर मुनि एवं संत सहजानंद मुनि के साथ पैदल विजय नगर की दिशा में विहार कर गए।संत मंडल बिजय नगर में अल्प प्रवास पूर्ण कर भीलवाड़ा जायेंगे। संत के ब्यावर प्रवास में नगर में धर्म ध्यान एवम अध्यात्म का वातावरण बन गया।
प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार
आशीष जैन पंकज कवाड़
फोटो जर्नलिस्ट
जयपुर ब्यावर पाली

