क्रौध आत्मा का स्वभाव नही जिसने क्रौध को जीत लिया वह भीतर मे क्षमा भाव प्रकट कर लिया- श्री श्रुतप्रभ जी

क्रौध आत्मा का स्वभाव नही जिसने क्रौध को जीत लिया वह भीतर मे क्षमा भाव प्रकट कर लिया- श्री श्रुतप्रभ जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 2 मार्च।
भगवान महावीर के प्रवचन की श्रृखंला से बताया जिस भगवान महावीर के पास कुछ भी नही था फिर भी बडे बडे राजा महाराजा उनके चरणो मे रहने के लिए तत्पर रहते थे क्योंकि भगवान के पास क्षमा अनाशक्ति सरलता के गुण प्रकट थे इसी कारण सारे राजा महाराजा उनके चरणो मे आकर शांति का अनुभव करते थे।
म सा ने बताया भगवान ने सबसे पहले क्रौध को जीत लिया और क्षमाभाव प्रकट कर लिया। वह ममत्व रहित बंधन रहित हो गये थे,भगवान महावीर ने क्षमा करके सभी का खाता बंद कर लिया फिर केवलज्ञान हो गये।
म सा ने कहा क्रौध आत्मा का स्वभाव नही है उसे करना पडता है जो जानबूझ कर किया जाता है गुस्सा आना कर्म का उदय होता है,क्षमा कर्म निर्जरा है, क्षमाशीलता बढाने के लिए तुरन्त प्रतिक्रिया नही करे धैर्य की परिक्षा देवे जैसे महावीर स्वामी ने धैर्य रखा था हमे भी तुरंत प्रतिक्रिया छोडकर भीतर मे क्षमाभाव रखे।
मसा ने कहा जितना बंधन उतना दुखी होना रहता कितनी चीजो का लगाव वो हमारा बंधन है, ममत्व को छोडे बिना मुक्ति नही होंगी, परिवार मे रहना बुरा नही आसक्ति बुरी है। हमे अठारह पापो की सुरक्षा करनी चाहिए।
इससे पहले साध्वी श्री प्रखर श्री जी म सा ने कहा तीर्थंकर देवो का धर्म बडी पुण्यवाणी से मिला बाद मे ढुंढने पर भी नही मिलेगा, शुभ कर्मो से हम सब को अनूकूलता मिलती है अशुभ कर्म प्रतिकूलता लाती है।धर्म अपना प्रभाव दिखाता है। अधर्म की जीत परमानेंट नही होती।
अध्यक्ष श्री गोतम चंद चौधरी ने कहा कल होली चातुमार्सिक पक्खी दिवस है तप त्याग के साथ मनाया जायेगा ज्यादा से ज्यादा तेला, उपवास दया संवर पौषध करने का लक्ष्य रखे।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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