ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 8 मार्च।
अत्यंत हर्ष का विषय है सुश्री रुपाली जी धोका यादगिरी कर्नाटक वाले ने समता भवन मे लगभग 150 महिलाओं को जैन धर्म की विशेषता पर विस्तार से बताया गया।
सरंक्षक वीना नाहर ने कहा इतनी अल्प वय में इतनी ऊर्जावान और बहुत सारी बातों की जानकारी रखने वाली रूपाली जी सकल जैन महिला मंडल सेमिनार का topicUniqueness of Jainism या जैन दर्शन की विलक्षणता बतायी।

सुश्री सोनाली जी ने बताया कि नो अजूबो के अलावा दसवां अजूबा हमारे साधु साध्वी जो बिना लाइट पंखे के बगैर रहते है। जीव की परिभाषा बताते हुए कहा अहिंसा, सत्य, अचौर्य, अपरिग्रह ब्रह्मचर्य होते है।
भक्त के भगवान पर बताया भक्तो के भगवान एक होना चाहिए इधर उधर नही भटकना चाहिए, जीव त्याग कर्म सिद्धांत पुण्य आत्मा का इंपोटेट व्रत होता है, जैन धर्म मे चार तीर्थ होते है जिसमे श्रावक श्राविका संत सतिया होती है।


विश्व मे जैन धर्म सबसे श्रेष्ठ धर्म है इस पर विस्तार से समझाया गया। हम क्यो दुसरा धर्म अपनाये उसे अपनाने के लिए हमे बलिदान देना पडा था।
अध्यक्ष गोतम चंद चौधरी व महामंत्री धर्मीचंद औस्तवाल ने बताया सुश्री रुपाली द्वारा जैन धर्म की विशेषता का शिविर पुरुषो के लिए सुबह समता भवन मे 7:15 से 8 बजे तक बतायी जायेगी इसमे सकल जैन संघ आमंत्रित है।बाद मे उनका बहुमान किया जायेगा।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

