ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 15 मार्च ।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य थोकडो के जानकार शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने समता भवन मे नियमित भगवान महावीर के प्रवचन की श्रृखंला से बताया हमे भगवान महावीर के उत्कर्ष धर्म को समझ लेना चाहिए जिससे हमारा कल्याण हो सके हमे भी भगवान की तरह आंख बंद करके ध्यान मे रहते हुए साधना करनी चाहिए जिससे हमको बहुत फायदा मिल जाता है।
म सा ने कहा जिसके भीतर क्षमा के गुण हो तो उसकी सहायता कही से भी हो जायेगी,सदकर्म इक्क्ठा करते जाओ जो इस भव मे पर भव मे काम आता रहे। म सा ने पूर्व बेर की कहानी पर बताया क्षमा वाला भाई मोक्ष की तरफ जाता है बेर वाला भाई नारकीय की ओर चले जाता है।
म सा ने कहा हमे अपने हित का ध्यान करना चाहिए पर हित मे नही पडे तभी आत्मा के हित का काम चालू हो जायेगा, हम किसी का कर्म नही बदल सकते, उत्कर्ष भाव मे रमन करने वाले के कर्म खत्म हो जाते है, आज हम पांचो इन्द्रियों की ऊर्जा दुसरे का दर्द दूर करने मे लगा देते है।
म सा ने कहा दुसरे को सुधारने का ठेका छोड दो अपने की सोचो,राग द्बेष की भावना को मोड दो अपने हित मे लगे रहो, सभी जीव मेरे मित्र हो,मैत्री भावना उज्जवल बनाती है जिस दिन हमारा सबसे मैत्री संबध हो जायेगा तो मोक्ष हो जायेगा।
इससे पहले महासती श्री जी म सा ने भजन से कहा गुरु नाना के जो राम मेरे दिल मे बसते है, हम आपदा मे चिंतन मे गुरु की शरण मे पहुंच कर अपनी जिज्ञासा को शांत करना चाहते उसके लिए हमे श्रद्धां भाव से पूछना चाहिए जो आगम की विधि के अनुसार हो।
म सा ने कहा सरलता से धर्म ठहरता है, ज्ञान दर्शन चरित्र स्वभाव से सरल होना चाहिए, सरलता भीतर मे होनी चाहिए,क्रौध,मान,माया, लोभ मे माया खतरनाक होती है क्योंकि माया मित्रता का नाश करती है।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

