पापो की आलोचना करके प्रायश्चित करे, आत्मा जाग्रत हो जाती है- श्री श्रुतप्रभ जी

पापो की आलोचना करके प्रायश्चित करे, आत्मा जाग्रत हो जाती है- श्री श्रुतप्रभ जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 7 अप्रैल।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य थोकडो के जानकार शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने समता भवन मे नियमित प्रवचन के दौरान प्रायश्चित पर कहा हम रोज पाप बांध रहे है, कितना पाप दिन भर मे कर लेते है लेकिन प्रायश्चित कितना करा सोचे इस जन्म मे क्यो बैठा हूं क्योंकि हम पापो से बंधे है, हमने पापो की आज तक आलोचना नही करी न कभी प्रायश्चित लिया।
म सा ने कहा जितने भी हमारे से अठारह पाप हुए उनकी आलोचना कर लेनी चाहिए प्रायश्चित से भीतर की आत्मा जाग्रत हो जाती है, पाप कर्म की विशुद्धि हो जाती है, प्रायश्चित एक प्रकार का तप है,प्रायश्चित करते करते कई महापुरुष केवल ज्ञान को प्राप्त हो गये।
म सा ने बताया आचार्य श्री रामेश तुरंत प्रायश्चित ले लेते कोई आज्ञा मे नही चलता तो, साधु और श्रावक के कर्म सब बराबर होते है उनको भोगना ही पडता है, क्षमा मांगने से प्रायश्चित नही होता क्षमा भीतर से होनी चाहिए तभी हम हल्के हो पायेंगे, अरिहंत देव मिच्छामि दुक्कडम बोलकर प्रायश्चित करना चाहिए ताकि क्षमा मिल सके।
शासन दीपिका महासती विध्यावती जी म सा ने अपनी कोकिला कंठ से भजन सुनाया मीठे मीठे काम भोग मे फंसना मत देवानु प्रिय, पाप गुण हमे नीचे की और ले जाता है।आलस्य सत्य होता है।
संचालन महामंत्री धर्मीचंद औस्तवाल ने करते हुए कहा आज की धर्म सभा मे सवाईमाधोपुर से वीर परिवार उपस्थित थे आने वाली नो अप्रेल को विश्व नवकार दिवस जवाहर भवन मे मनाया जायेगा इसमे आप सब सपरिवार भाग लेकर विश्व शांति के लिए जाप करके दुआ मांगेंगे।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

Chhattisgarh