ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 21 अप्रैल।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने समता भवन मे प्रवचन देते हुए बताया भगवान महावीर के जीवन मे विशेषता रही छदमस्त अवस्था मे लेकर दीक्षा के बाद भी ध्यान मे सदैव रहते थे सदैव चिंतन करते गये लोगो को सुख कैसे मिले। मनचाह हो जाये अनचाह चला जाए,यानि सुख आये दुख चले जाए।
म सा ने कहा आज हम किसी को नही चाहते उससे पींड छुटाना चाहते जैसे गरीबी से बिमारी से बुजुर्ग से पींड छूट जाए शांति मिल जाए लेकिन पींड छूटना आसान नही कर्म भोगना पडेगा तभी छुटेगा। पूर्व जन्म मे किया कर्म भोगे बिना शांति नही और नया कर्म नही बांधेगे।भविष्य की मत सोचो पुरुषार्थ करते रहो।
म सा ने कहा हर समय सुख की नही सोचे,जो होगा वो अरिहंत भगवान चाहेंगे वही होगा,अपनी ऊर्जा को सोचने मे नही व्यर्थ करे जो हो रहा है उसे स्वीकार कर लूवें।आर्त ध्यान मन को नियंत्रित नही कर सकता,धर्म मे रस नही आने पर हम संसार बढाते जा रहे है।आर्त ध्यान बढता है तो कर्म बंधता जाता है।
विचारों पर नियंत्रण करना है तो निरंतर स्वाध्याय करते रहे।
इससे पहले शासन दीपिका श्री विध्यावती जी म सा ने भजन से कहा इस तन का नही ठिकाना इक दिन मिट्टी मे मिल जाना,तीर्थंकर भगवान महावीर ने इन्द्रभुति गणधर की उच्च सभा मे एकेन्द्रिय से लेकर पंचेन्द्रिय जीवो से लेकर देवता भी सुनने को आये गये ओर बताया जो व्यक्ति जिस श्रद्धा से आगे बढता है उसी श्रद्धा से पालन करते रहे।
म सा ने कहा हमने जो संकल्प लिया हमे उसी संकल्प को लेकर आगे बढते रहे।इस जन्म मे इतनी पुण्यवाणी कमा लो जो आगे काम आयेगी जैसे रतलाम मे महासती जी किर्तीयशा जी म सा ने आज संथारे का इकावन वा दिन चल रहा है यह उनकी पुण्यवाणी है।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

