स्कूलों में वैदिक मंत्रोच्चार पर आपत्ति : मसीह समाज और कांग्रेस ने सरकार के फैसले का किया विरोध

स्कूलों में वैदिक मंत्रोच्चार पर आपत्ति : मसीह समाज और कांग्रेस ने सरकार के फैसले का किया विरोध

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 18 जुन । छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में वैदिक मंत्रोच्चार को अनिवार्य किए जाने के फैसले को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और मसीह समाज (क्रिश्चियन वेलफेयर सोसायटी) ने आपत्ति जताई है। जबकि राज्य सरकार ने अपने निर्णय को उचित बताया है।

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने कहा कि इस फैसले से स्कूलों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सरकारी स्कूलों में वैचारिक एजेंडा लागू करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि भारत विविध धार्मिक मान्यताओं वाला देश है और किसी एक धर्म से जुड़े मंत्रों को अनिवार्य करने से अन्य समुदायों में असंतोष पैदा हो सकता है।

वहीं, क्रिश्चियन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल ने इस निर्णय को संविधान की भावना के विपरीत बताते हुए ईसाई समुदाय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को इससे छूट देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती, तो मसीह समाज न्यायालय का रुख करेगा।

सूत्रों के अनुसार, कुछ शिक्षकों और स्कूल प्रबंधनों ने भी अनौपचारिक रूप से इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि शिक्षा के साथ धार्मिक गतिविधियों को जोड़ने से अनावश्यक विवाद की स्थिति बन सकती है।

इधर, कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि वैदिक मंत्र भारतीय संस्कृति और परंपरा का हिस्सा हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विद्यार्थी वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर रहे हैं तो इसमें आपत्ति की क्या वजह है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

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