वर्ल्ड रिकॉर्डधारी कामधेनु माता ‘सौम्या’ पंचतत्व में विलीन, खैरागढ़ में श्रद्धा के साथ दी गई समाधि.. 54 इंच लंबी पूंछ के कारण गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में था नाम, हजारों श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन कर दी श्रद्धांजलि

वर्ल्ड रिकॉर्डधारी कामधेनु माता ‘सौम्या’ पंचतत्व में विलीन, खैरागढ़ में श्रद्धा के साथ दी गई समाधि.. 54 इंच लंबी पूंछ के कारण गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में था नाम, हजारों श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन कर दी श्रद्धांजलि


रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 10 जुलाई । खैरागढ़ स्थित मनोहर गौशाला की वर्ल्ड रिकॉर्डधारी कामधेनु माता ‘सौम्या’ का शुक्रवार तड़के 2:27 बजे लगभग 23 वर्ष की आयु में संथारापूर्वक देवलोक गमन हो गया। अंतिम समय में उन्होंने प्रभु वाणी, णमोकार मंत्र और भक्तामर स्तोत्र का श्रवण करते हुए शांत भाव से देह त्याग किया।

दोपहर में मनोहर गौशाला से उनकी समाधि यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। जीरावला मनोहर जीवदया धाम में विधि-विधान के साथ उन्हें समाधि दी गई।


रायपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर खैरागढ़ स्थित मनोहर गौशाला में वर्ष 2017 में स्थापित कामधेनु मंदिर की प्रमुख आस्था थीं सौम्या। 54 इंच लंबी पूंछ के कारण उनका नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था। गौशाला प्रबंधन के अनुसार उनके शरीर पर मौजूद विशेष प्रतीक चिह्नों के कारण श्रद्धालु उन्हें साक्षात कामधेनु माता मानते थे।

पिछले लगभग आठ वर्षों में 30 हजार से अधिक श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचे। उनके जीवनकाल में लगभग 142 जैन साधु-साध्वियों तथा अनेक आचार्यों से मांगलिक और णमोकार मंत्र का श्रवण हुआ। प्रदेश के तीन राज्यपालों सहित अनेक संत और विशिष्ट अतिथि भी उनके दर्शन कर चुके थे।

क्यों थीं विशेष?
गोधन के जानकारों के अनुसार सौम्या में शास्त्रों में वर्णित कामधेनु के कई लक्षण दिखाई देते थे। 54 इंच लंबी पूंछ, शरीर पर विशेष प्रतीक चिह्न और उनका विशिष्ट स्वरूप उन्हें अन्य गायों से अलग पहचान दिलाता था। इन्हीं विशेषताओं के कारण वे वर्षों तक लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बनी रहीं।

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