कवर्धा में मलेरिया का कहर : 8-10 गांव चपेट में, 3 मौतों का दावा, 80 से अधिक संक्रमित

कवर्धा में मलेरिया का कहर : 8-10 गांव चपेट में, 3 मौतों का दावा, 80 से अधिक संक्रमित

कवर्धा(अमर छत्तीसगढ़) 30 जुलाई । कांकेर जिले के बाद अब कबीरधाम जिले के वनांचल क्षेत्र में भी मलेरिया का प्रकोप गंभीर होता जा रहा है। जिले के बोड़ला विकासखंड के झलमला सेक्टर के 8 से 10 गांवों में संक्रमण तेजी से फैलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का दावा है कि अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 70 से 80 से अधिक लोग संक्रमित मिले हैं।

जानकारी के अनुसार झलमला सेक्टर में 17 जुलाई के बाद मलेरिया के मरीज मिलने शुरू हुए थे। शुरुआती दौर में बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे समय पर व्यापक जांच, मच्छर नियंत्रण और रोकथाम के पर्याप्त इंतजाम नहीं हो सके। इसके बाद संक्रमण तेजी से फैलता गया। वर्तमान में मुडवाही, सोनवाही, जामुनपानी, सरेंडा, बोदलपानी, समनापुर, झलमला और बहनाखोदरा समेत कई गांव इसकी चपेट में हैं।

ग्रामीणों के अनुसार मुडवाही निवासी करीब 50 वर्षीय शुकवारिन बैगा की 21 जुलाई को मौत हुई। इसके बाद 24 जुलाई को 11 वर्षीय जगदीश ध्रुवे की मौत हो गई। वहीं जामुनपानी निवासी 19 वर्षीय नरेश गोंड ने झलमला स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि बीमारी की गंभीरता को समय रहते नहीं समझा गया, जिससे हालात लगातार बिगड़ते गए।

झलमला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने से अस्पताल में बेड कम पड़ गए हैं। स्थिति ऐसी है कि दो-दो मरीजों को एक ही बिस्तर पर भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार संक्रामक बीमारी के दौरान ऐसी व्यवस्था संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा सकती है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने से दबाव की स्थिति बनी है।

प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से मच्छरदानियों का वितरण नहीं किया गया। उनका कहना है कि समय पर मच्छरदानी, फॉगिंग, दवा छिड़काव और स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते तो बीमारी के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता था।

सोनवाही गांव में पिछले 10 दिनों में 35 से अधिक मरीज मिलने का दावा किया गया है, जबकि समनापुर में एक ही परिवार के चार सदस्य मलेरिया से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है।

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