ब्रह्मचर्य की अपार शक्ति ब्रह्मांड तक को भी हिला सकती है – विनय मुनि जी

ब्रह्मचर्य की अपार शक्ति ब्रह्मांड तक को भी हिला सकती है – विनय मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 13 सितंबर ।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने पयुर्षण पर्व में खचाखच भरे समोह शरण की रचना मे समता भवन के प्रवचन हाल मे गुरु भगवंत उपाध्याय प्रवर को वंदन के बाद अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए प्रवचन का सार अपनी शक्ति का स्त्रोत ब्रह्मचर्य की शक्ति को आत्म रमण में लगावें क्योंकि आज लोग इस शक्ति भोग में लगाते जा रहे। वैचारिक उत्तेजना का साधन समझ रखा जो दुनिया में कम नहीं इसका असर मन के ऊपर होता जा रहा और हमारी इन्द्रियां बस ‌नहीं रह पा रही।


(जिनशासन कहता आओ भगवान बना दूंगा)
म सा ने इससे ‌‌पहले कहा जिनशासन कहता आओ भगवान बना दूंगा, अच्छा भोजन अच्छा विचार अच्छा व्यवसाय करने के साथ आवश्यकता शरीर को स्वस्थ रखने की वो हमें शक्ति का स्त्रोत से होती है जो सभी के लिए है विषय उपयोगी बनेगाअक्षर वो शक्ति ब्रह्मचर्य पालने से मिलती है,ब्रह्मचर्य का मतलब बताय जो आत्मा में रमण करना पर।

जब तक ब्रह्मचर्य की शक्ति है वीर्य है तो चेहरे पर चमक रहेगी शरीर सुंदर तेज रहेगा, नहीं तो बंदुक बिना गोली की होती तो बच्चों का खिलोना बन जाती हैं,अपने विचारों को पवित्र रखना है तो वीर्य को बचाना होगा।


(ब्रह्मचर्य की शक्ति अपार श्रीलालजी रिद्धि के त्यागी )
म सा ने बताया ब्रह्मचर्य की महीमा अपाड है यह एक संजीवनी बूटी है,इसकी अराधना मन,वचन,काया से होती है जैसे ऋषि महात्मा ने इसकी अराधना करते हुए नाम कमाया इसके तप सूली का सिंहासन बन गया सीता के लिए अग्नि शीतल पानी बन गई। ब्रह्मचर्य का तेज कीचड़ में कमल खिलने के समान है आकाश में खिल जाता है।

इसी के कारण हमारे हुक्म संघ के आचार्य श्रीश्री लाल जी म सा ने छोटी उम्र में ब्रह्मचर्य का व्रत ले लिया इसका महत्व जान गये थे और आत्मा में रमण करते गये।भजन से कहा श्रीलाल रिद्धि के त्यागी।भजन से कहा गुरुवर पधारो हृदय में विरोजो यही भावना है मेरी यही भावना मेरी..


( ब्रह्मचर्य शरीर की मशीन का यंत्र है)
म सा ने बताया हमे मुक्ति नगर में प्रवेश करना है तो शरीके सहयोग की आवश्यकता है,शरीर की शक्ति क्या होती है? शक्ति पाने के लिए शरीर को स्वस्थ रखना पड़ेगा।यह शरीर एक मशीन है जो ब्रह्मचर्य शरीर रुपी यंत्र है, इसकी शक्ति को बचाना होगा नहीं जो सारे ब्रह्माण्ड को हिला डालती है,अपने विचारों को पवित्र रखने के साथ वीर्य बचाना है।

ब्रह्मचर्य की शक्ति अरिष्ट नेमी के पास थी जिसे देख कर श्रीकृष्ण वासूदेव भी कांपने लगे।उनकी भुजा को हिला नहीं सके यह देखकर उनके होश उड़ गये।


( याद रखें मैं श्रमणोपाषक हूं )
इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने कहा श्रावक याद रखें में श्रमणोपाषक हूं।जैन व्यक्ति में यही धारणा होनी चाहिए मैं जैन हूं। भगवान महावीर जानते पहले स्वयं का कल्याण करूं फिर पर कल्याण करूं। परिवर्तन दिनचर्या के चिंतन से होता है, व्यक्ति बदलना नहीं चाहता है,आत्मा में लीन रहने वाला सदा आत्मा में रमण करता है क्योंकि आत्मा ही उसका वास हैं।


(नवकार मंत्र महामंत्र इसकी महीमा भारी है)
इससे पहले श्रीराम गुप्त जी म सा ने नवकार मंत्र की महिमा गाते हुए कहा नवकार मंत्र से महामंत्र इसकी महिमा भारी है आगम ने कहीं गुरुवर से सुनी भव भव में जिसे उतारी है,अपने बच्चों को इसके पांचों पदों का महत्व गुणों को समझावे बताए।
( संजू भैया ने की है तपस्या )
संचालन अध्यक्ष गोतम चंद चौधरी ने करते हुए कहा कल का प्रवचन निर्मल दृष्टि का अदभुत प्रभाव आज धर्म सभा में संजय श्रीश्रीमाल ने 30 का व जितेन्द्र मुणोत ने 12 व 9,8,7,6,5,4,3,2 व उपवास के प्रत्याखान हुए वहीं म सा ने बड़ी तपस्या करने वाले पर भजन से बताया संजू भइया ने की तपस्या वीरों का किया काम है,इनके तप का करें बहुमान है,बड़ा कठिन है करना तपस्या,राम गुरु की बरसी कृपा आज है।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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