श्री अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ का पूरे भारतवर्ष मे 127 जगह र्चातुर्मास…. मानव बनना और मानव बनाना है यही मानवता है- श्री विनय मुनि

श्री अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ का पूरे भारतवर्ष मे 127 जगह र्चातुर्मास…. मानव बनना और मानव बनाना है यही मानवता है- श्री विनय मुनि

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 30 जुलाई।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा. ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए कहा हुक्मसंघ के नक्षत्र आचार्य भगवन व बहुश्रुत वाचनाचार्य को वंदन नमन करते हुए बताया सबसे कठिन कार्य कौनसा है? बताया सबसे कठिन पहले स्वयं मानव बने दुसरे को मानव बनावे, हमारा पहला कर्तव्य मानवता को प्राप्त करना होता है लेकिन आज आधिकांश व्यक्तियो की मानवता मर चुकी है इसी कारण रिश्तो के प्रति संवेदना सहानुभूति नही रही।


म सा ने इससे पहले कहा चोमासो लाग्यो अब तो सगला जागो, हमने कल से बैठती चौमासी का प्रतिक्रमण से आत्मा को हल्की करने का प्रयत्न किया,हमने स्वयं के प्रति कितनी तैयारी कर ली क्योंकि स्वंय को भुलते जा रहे स्वार्थ की दुनिया मे जी रहे हैं और हम मानवता को भुलते जा रहे है। मानव से व निकालो गे तो मान नजर आयेगा।मानव तुम मानव बनो दिल मे विश्व प्रेम की भावना हो, सहानुभूति की भावना हो।


म सा ने कहा सहानुभूति धर्म का बीज उत्पन्न करता है,सधा साधु वो ही होता जो साधु समागम मे रहता है,साधक मे आडम्बर प्रदर्शन और मिथ्यात्व की पृवतीयो से दूर होकर शांति शुकून मिलेगा। संत हमारे जीवन मे आगे बढाने के लिए आक्सिजन का काम करते है। एक दुसरे को देखकर प्रेम उबडना चाहि। आज मानवता कपूर की टिकीया की तरह उड गयी, हमे जागरुक होकर मानवता का गुण प्रकट करना होगा।मानविय गुण के लिए फैमिली गुरु होना जरुरी है।


म सा ने कहा आज के समय जैसा अन्न वैसा मन होगा है जेसा पानी वैसी वाणी होगी इसलिए मानवता मरती जा रही है, खुश रहना है तो संतोषी प्रवृती रखे संकिर्ण विचारों मे जीकर मानव गुण प्रकट करें अंत उदयवीर की कथा के माध्यम से बताया कैसे अशुभ कर्म के कारण विभिन्न रोग उत्पन्न हो गये।


इससे पहले श्री दिव्य दर्शन जी म सा ने कहा पहले की जीवन शैली मे आज की जीवन शैली मे बहुत बडा फर्क आ गया, मनुष्य जन्म दुबारा मिले यही मन मे भाव होना चाहिए, पहले लोगो को सेठ बोलते थे क्योंकि उनका आचरण अच्छा था, दान देकर बताना नही चाहिए इस जीवन मे कुछ करके जाये, मोर्डन बनकर नही व्यवहारिक बनकर बताए इस कलयुग मे आंखो मे शर्म ही नही रहेगी। जैन धर्म मे खोट नही होती, साधु संतो को सुनना हमारा कर्तव्य हैं।


संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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