IAS अमित कटारिया पर बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत : लोकसभा सचिवालय ने मांगी रिपोर्ट, छत्तीसगढ़ में अफसरशाही पर सियासत तेज

IAS अमित कटारिया पर बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत : लोकसभा सचिवालय ने मांगी रिपोर्ट, छत्तीसगढ़ में अफसरशाही पर सियासत तेज

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 3 अगस्त । छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर अफसरशाही को लेकर बहस तेज हो गई है। भाजपा सांसद एवं वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमित कटारिया के कथित व्यवहार को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिकायत की है। इस मामले में लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।

बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि फोन पर हुई बातचीत के दौरान आईएएस अमित कटारिया ने जनप्रतिनिधि के सम्मान के अनुरूप व्यवहार नहीं किया और कथित तौर पर कहा कि “जो करना है कर लीजिए।” सांसद का कहना है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की गरिमा के विपरीत है।

सांसद की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय की ओर से डीओपीटी से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। अब रिपोर्ट मिलने के बाद सचिवालय आगे क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति को भी गरमा दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत शिव डहरिया ने बृजमोहन अग्रवाल के समर्थन में प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश में अफसरशाही के बढ़ते प्रभाव को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

वहीं, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी अफसरशाही हावी रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सभी अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों की बात गंभीरता से सुननी चाहिए और लोकतांत्रिक मर्यादा का पालन करना चाहिए।

यह पहला अवसर नहीं है जब बृजमोहन अग्रवाल ने अधिकारियों के कामकाज पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले नकटी प्रकरण और राजधानी रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ खुलकर असंतोष व्यक्त किया था। इस बार मामला एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा और तेज हो गई है।

अब सभी की निगाहें डीओपीटी की रिपोर्ट और लोकसभा सचिवालय की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर क्या कदम उठाती है। फिलहाल, बृजमोहन अग्रवाल की लगातार बढ़ती शिकायतें यह संकेत जरूर दे रही हैं कि प्रदेश में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संबंधों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Chhattisgarh