बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 4 अगस्त । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों (पैरामिलिट्री फोर्स) के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक कांस्टेबल को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने विभागीय कार्रवाई को सही ठहराते हुए वेतन में एक स्तर की कटौती (संचयी प्रभाव सहित) की सजा को बरकरार रखा और याचिका खारिज कर दी।
मामले में कांस्टेबल ने अनुशासनात्मक और अपीलीय प्राधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एक वर्ष के लिए उसकी वेतन वृद्धि के एक स्तर की कटौती की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसका भारतीय सेना या पैरामिलिट्री बलों का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। उसने यह भी दावा किया कि विभाग यह साबित नहीं कर पाया कि आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट उसी ने अपलोड किए थे। साथ ही उसने आरोप लगाया कि विभागीय जांच में उसे अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और दी गई सजा अत्यधिक कठोर है।
विभाग की ओर से अदालत को बताया गया कि कांस्टेबल ने 23 और 24 जून 2020 को अपने फेसबुक अकाउंट से भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के खिलाफ पांच आपत्तिजनक पोस्ट साझा किए थे। मामले में नियमानुसार विभागीय जांच की गई, जिसमें आरोपी कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता विभागीय जांच में शामिल हुआ था और उसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप अपना बचाव प्रस्तुत करने का पर्याप्त मौका मिला था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक त्रुटि, प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन या अनुशासनात्मक प्राधिकारी की अक्षमता साबित करने में विफल रहा है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायालय तब तक विभागीय कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, जब तक जांच प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता या सजा स्पष्ट रूप से असंगत और अनुचित न हो। अदालत ने माना कि सेना और अर्धसैनिक बलों के खिलाफ आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट करना गंभीर कदाचार है और ऐसे मामले में वेतन कटौती की सजा पूरी तरह उचित है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने सीआईएसएफ कांस्टेबल की याचिका खारिज करते हुए विभागीय कार्रवाई को वैध और न्यायसंगत माना।

