500 करोड़ के ठग केके श्रीवास्तव का बड़ा खुलासा : ED ने खोला दुबई-चीन तक फैले इंटरनेशनल मनी ट्रेल का राज

500 करोड़ के ठग केके श्रीवास्तव का बड़ा खुलासा : ED ने खोला दुबई-चीन तक फैले इंटरनेशनल मनी ट्रेल का राज

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 4 अगस्त । प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 500 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके का झांसा देकर दिल्ली के कारोबारी से 15 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में बड़ा खुलासा किया है। गिरफ्तार आरोपी कृष्ण कुमार श्रीवास्तव से पूछताछ में सामने आया है कि उसने पीड़ित कारोबारी को ठगी की रकम में से केवल 3.40 करोड़ रुपये ही लौटाए, जबकि 11.60 करोड़ रुपये शेल कंपनियों के जरिए विदेशों में ट्रांसफर कर दिए गए।

ईडी के अनुसार, आरोपी ने धोखाधड़ी से हासिल रकम को शेल कंपनियों और अन्य संस्थाओं के नेटवर्क के माध्यम से तेजी से लेयरिंग करते हुए दुबई (यूएई), हांगकांग, चीन और सिंगापुर में स्थित लाभार्थियों तक पहुंचाया। रकम भेजने के लिए मालभाड़ा और कंटेनर लीजिंग जैसे फर्जी व्यावसायिक लेन-देन का सहारा लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ित को लौटाए गए 3.40 करोड़ रुपये भी इसी लेयरिंग किए गए धन का हिस्सा थे, जिन्हें वैध भुगतान के रूप में दर्शाया गया।

ईडी ने बताया कि अप्रैल 2025 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत की गई तलाशी के दौरान हस्तलिखित वित्तीय रिकॉर्ड, व्यक्तिगत डायरी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कृष्ण कुमार ने इसी तरह की कार्यप्रणाली अपनाकर एक अन्य कारोबारी के साथ भी धोखाधड़ी की थी। पूछताछ के दौरान आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया और महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का प्रयास किया।

जांच के मुताबिक, जून 2023 में कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने रावत एसोसिएट्स के मालिक अर्जुन सिंह रावत को विश्वास दिलाया कि रायपुर स्मार्ट सिटी परियोजना में 500 करोड़ रुपये का सब-कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध है। इसके लिए उसने 15 करोड़ रुपये परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के रूप में जमा कराने की शर्त रखी। भरोसा दिलाने के लिए आरोपी ने परियोजना से जुड़े फर्जी दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।

ईडी की जांच में सामने आया कि यह राशि पांच अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई, जिनकी जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी गई थी। जांच में पाया गया कि ये खाते कथित खाताधारकों की जानकारी के बिना धोखाधड़ी से खोले गए थे और जिन कंपनियों के नाम पर खाते थे, वे अपने पंजीकृत पते पर अस्तित्व में ही नहीं थीं। फिलहाल ईडी मामले की गहन जांच कर रही है और विदेश भेजी गई रकम के अंतिम लाभार्थियों के साथ-साथ पूरे वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हुई है।

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