सूरजपुर(अमर छत्तीसगढ़) 4 अगस्त । प्रतापपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत मदननगर में सरपंच सुंदरी बाई को पद से हटाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में उपसरपंच सहित 20 पंचों ने सामूहिक इस्तीफा देकर एसडीएम को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रशासन ने प्रभावित किसानों और आदिवासी समाज की आवाज़ दबाने के लिए एकपक्षीय कार्रवाई की है।
जिला प्रशासन के अनुसार, एसईसीएल की प्रस्तावित मदननगर ओपन कास्ट खदान के लिए 2 और 3 अप्रैल 2026 को चल रहे भूमि सर्वेक्षण के दौरान सरपंच सुंदरी बाई के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सर्वे कार्य का विरोध किया। आरोप है कि भीड़ ने सर्वे टीम के काम में बाधा डाली, अधिकारियों को डराया-धमकाया और शासकीय कार्य प्रभावित किया।

कारण बताओ नोटिस के जवाब में सरपंच सुंदरी बाई ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना था कि सर्वे से पहले ग्रामसभा या पंचायत को कोई सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण हथियारबंद नहीं थे और उन्होंने किसी को उकसाया नहीं। साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि मदननगर पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां पेसा नियम लागू होते हैं और ग्रामसभा की सहमति आवश्यक है।
प्रशासन ने पटवारियों के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और व्यक्तिगत सुनवाई के आधार पर सरपंच का जवाब असंतोषजनक माना। इसके बाद छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 40(1)(ख) के तहत सरपंच सुंदरी बाई को तत्काल प्रभाव से पद से पृथक कर दिया गया।

इस कार्रवाई के विरोध में उपसरपंच सहित 20 पंचों ने सामूहिक इस्तीफा देकर प्रशासन के फैसले का विरोध जताया। उनका कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और आदिवासी समुदाय के अधिकारों के खिलाफ है तथा प्रभावित किसानों की आवाज़ दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
मदननगर पंचायत में एक साथ 20 पंचों के इस्तीफे के बाद मामला अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ता नजर आ रहा है। क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

