रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 9 अगस्त । रायपुर केंद्रीय जेल की आस्था कैंटीन और कैफे सेंटर अब एक नई पहल शुरू करने जा रहा है। जेल में बंद कैदियों द्वारा तैयार किया गया भोजन अब आम लोगों को भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल के तहत तैयार किए जाने वाले फूड पैकेट का नाम ‘जेल की रोटी’ रखा गया है। जेल प्रशासन अगस्त महीने से इसकी शुरुआत करने की तैयारी में है। शुरुआती दौर में प्रतिदिन केवल 30 फूड पैकेट तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक पैकेट की कीमत 275 रुपये निर्धारित की गई है।
‘जेल की रोटी’ के लिए भोजन रायपुर केंद्रीय जेल परिसर में ही कैदियों द्वारा तैयार किया जाएगा। फूड पैकेट लेने के लिए लोगों को आस्था कैंटीन में पहले से बुकिंग करानी होगी। इसके बाद निर्धारित समय पर उन्हें फूड पैकेट उपलब्ध कराया जाएगा। जेल प्रशासन ने शुरुआत में पैकेट की संख्या सीमित रखने का फैसला किया है, ताकि भोजन तैयार करने से लेकर पैकेजिंग और वितरण तक की पूरी व्यवस्था व्यवस्थित तरीके से संचालित की जा सके।
रायपुर केंद्रीय जेल की आस्था कैंटीन अपने खाद्य उत्पादों के लिए पहले से ही लोगों के बीच लोकप्रिय है। यहां कैदियों द्वारा तैयार की जाने वाली मुंगौड़ी को खास तौर पर पसंद किया जाता है। इसके अलावा कैंटीन में समोसा, जलेबी, मिक्चर सहित कई अन्य खाद्य पदार्थ भी तैयार किए जाते हैं। पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से संचालित इस कैंटीन में जेल के बनाए खाद्य उत्पाद खरीदने के लिए लोगों की अच्छी संख्या में पहुंच होती है। अब जेल प्रशासन ने इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए कैदियों के हाथों से तैयार भोजन को भी आम लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया है।
रायपुर केंद्रीय जेल के अधीक्षक योगेश क्षत्री ने बताया कि ‘जेल की रोटी’ शुरू करने का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कैदियों को काम से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि फूड पैकेट की बिक्री से होने वाली आय को कैदियों के कल्याण और पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च किया जाएगा। इसके साथ ही इस पहल के माध्यम से कैदियों को काम सीखने और अपनी मेहनत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
जेल प्रशासन को उम्मीद है कि ‘जेल की रोटी’ की यह पहल कैदियों के पुनर्वास के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी उपयोगी साबित होगी।

